दिल्ली में TMC को झटका? ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें, बगावत के संकेत

तारीख: 3 जून 2026 | स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जून 2026 की शुरुआत एक बड़े राजनीतिक भूचाल के साथ हुई। मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजरती दिखाई दे रही है। पार्टी से निष्कासित नेता Ritabrata Banerjee ने दावा किया कि उन्हें करीब 58-60 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे पार्टी में बड़ी टूट की स्थिति बन गई।

पूरा मामला क्या है?

1 जून 2026 को TMC ने ऋतब्रत बनर्जी और एक अन्य विधायक को “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में निष्कासित कर दिया था।

लेकिन इसके दो दिन बाद, 3 जून को ऋतब्रत बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को लगभग 59 विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंप दिया। इस कदम ने TMC नेतृत्व को बड़ा झटका दिया क्योंकि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से बड़ी संख्या उनके साथ बताई गई।

क्यों महत्वपूर्ण है 58-60 विधायकों का आंकड़ा?

भारत के दल-बदल कानून के अनुसार किसी विधायक दल में वैध विभाजन के लिए कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। TMC के 80 विधायकों में यह संख्या 54 होती है। रिपोर्टों के अनुसार बागी गुट ने इस सीमा को पार करने का दावा किया है।

ममता बनर्जी के लिए संकट क्यों?

  • पार्टी के अंदर नेतृत्व को खुली चुनौती मिली।
  • विधानसभा में TMC विधायक दल की एकजुटता पर सवाल उठे।
  • कई सांसदों के भी असंतुष्ट होने की खबरें सामने आने लगीं।
  • पार्टी को संगठन बचाने के लिए आपात कदम उठाने पड़े।

TMC ने क्या कदम उठाए?

बढ़ते विद्रोह को रोकने के लिए TMC ने पश्चिम बंगाल में अपने कई संगठनात्मक और फ्रंटल विंग्स को भंग कर दिया। पार्टी ने कहा कि संगठन की व्यापक समीक्षा की जाएगी और नए सिरे से ढांचा तैयार किया जाएगा।

सांसदों तक पहुंचा संकट

विधानसभा में बगावत के बाद खबरें आने लगीं कि पार्टी के कुछ सांसद भी नेतृत्व से नाराज हैं। रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं और TMC नेतृत्व को सांसदों के संभावित अलग रुख की चिंता सताने लगी।

क्या TMC टूट जाएगी?

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, यह TMC के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है, जबकि बागी गुट खुद को “असली TMC” बताने की कोशिश कर रहा है।

एक नजर में

  • घटना: TMC में बड़ी बगावत
  • मुख्य चेहरा: Ritabrata Banerjee
  • तारीख: 3 जून 2026
  • समर्थन का दावा: 58-60 विधायक
  • कुल TMC विधायक: 80
  • मुद्दा: पार्टी नेतृत्व और विधायक दल पर नियंत्रण
  • प्रभाव: ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती
  • वर्तमान स्थिति: राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी

संक्षेप में, यह मामला सिर्फ कुछ नेताओं की नाराजगी नहीं, बल्कि TMC के भीतर शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है। यदि बागी गुट अपना समर्थन बनाए रखता है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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