Rajesh Exports पर SEBI का बड़ा एक्शन: ₹15 लाख करोड़ से ज्यादा राजस्व बढ़ाने का आरोप, शेयर 5% लोअर सर्किट में लॉक
तारीख: 7 जून 2026
भारत की प्रमुख स्वर्ण निर्यातक कंपनी Rajesh Exports गंभीर जांच के दायरे में आ गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के अंतरिम आदेश के बाद कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली और स्टॉक 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। SEBI ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने अपनी स्विस सहायक कंपनी Valcambi के माध्यम से लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये (करीब 159 अरब डॉलर) का राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।
क्या है पूरा मामला?
SEBI की प्रारंभिक जांच के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच Rajesh Exports ने अपने समेकित (Consolidated) राजस्व का 97% से 99% हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से Valcambi, से आने का दावा किया। लेकिन जांच में पाया गया कि Valcambi के स्वतंत्र वित्तीय रिकॉर्ड में इतनी बड़ी आय का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।
नियामक का आरोप है कि कंपनी ने लगभग 159 अरब डॉलर के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे निवेशकों और बाजार को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति के बारे में भ्रमित किया गया।
SEBI ने और क्या आरोप लगाए?
जांच के दौरान केवल राजस्व से जुड़े सवाल ही नहीं उठे, बल्कि कई अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं।
SEBI के अनुसार:
- अफ्रीका में कथित सोने की खदानों में निवेश के पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले।
- कुछ लेन-देन को काल्पनिक (Fictitious Transactions) बताया गया।
- एक स्थानीय ब्रोकर के साथ हजारों करोड़ रुपये के कथित सौदों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
- कंपनी और उसके प्रमोटरों द्वारा वित्तीय जानकारी साझा करने में पर्याप्त सहयोग नहीं किया गया।
शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा?
SEBI की कार्रवाई सामने आते ही निवेशकों में घबराहट फैल गई। कंपनी का शेयर 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया और बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो कंपनी को भारी कानूनी और वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कंपनी ने क्या कहा?
Rajesh Exports ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके वित्तीय आंकड़े सही हैं। कंपनी का दावा है कि SEBI और कंपनी के बीच राजस्व की गणना को लेकर “कम्युनिकेशन गैप” और “गलतफहमी” हुई है।
कंपनी ने यह भी कहा कि SEBI का आदेश केवल अंतरिम (Interim) है और अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
SEBI की कार्रवाई
SEBI ने कंपनी और उसके चेयरमैन Rajesh Mehta के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। जांच पूरी होने तक कई प्रतिबंध लगाए गए हैं और फॉरेंसिक ऑडिट को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े कथित अकाउंटिंग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मामलों में से एक बन सकता है।
इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि:
- कंपनियों के वित्तीय खुलासों की निगरानी कितनी प्रभावी है?
- विदेशी सहायक कंपनियों के खातों की पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए?
- निवेशकों को किन संकेतों पर सतर्क रहना चाहिए?
निष्कर्ष
Rajesh Exports पर लगे 159 अरब डॉलर के कथित राजस्व हेरफेर के आरोपों ने भारतीय शेयर बाजार में हलचल मचा दी है। SEBI की जांच जारी है और कंपनी सभी आरोपों से इनकार कर रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और कंपनी की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह मामला केवल एक विवाद बनकर रह जाता है या भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक साबित होता है।

