हजारीबाग में मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

हजारीबाग में मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

झारखंड के हजारीबाग जिले से एक बेहद संवेदनशील और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और स्थानीय लोग आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार घटना उस समय हुई जब पीड़िता अपने घर में अकेली थी। उसके पिता मजदूरी के सिलसिले में राज्य से बाहर गए हुए थे, जबकि उसकी मां बकरी चराने घर से बाहर गई थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला लगभग 40 वर्षीय प्रभु महतो कथित तौर पर घर में घुस गया। आरोप है कि उसने मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया।

परिजनों द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने घटना के दौरान बच्ची के साथ मारपीट की, जिससे वह बेहोश हो गई। कुछ समय बाद जब पीड़िता की मां घर लौटी तो उसने आरोपी को मौके पर देखा। इसके बाद उसने शोर मचाया, जिसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तुरंत पीड़िता को इलाज और मेडिकल परीक्षण के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज किया जा रहा है।

सदर एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह ने बताया कि पीड़िता की मां के लिखित आवेदन के आधार पर गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस सभी आवश्यक साक्ष्य एकत्र कर रही है और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम मामले के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि महिलाओं, बच्चों और विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर रोक लगाने के लिए दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा मिलनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और निगरानी को लेकर विशेष सतर्कता आवश्यक है। इसके साथ ही ऐसी घटनाओं में पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।

कानून के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में सख्त प्रावधान हैं। ऐसे मामलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाती है और दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड का प्रावधान है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता से होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना समाज के सामने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करती है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अपराध रोकने के लिए केवल कानून ही नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सतर्कता भी जरूरी है। लोगों से अपील की जा रही है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेगा। वहीं पीड़िता का इलाज जारी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़िता और उसके परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा मामले में निष्पक्ष जांच के बाद दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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