भरत तिवारी एनकाउंटर: फोन से खुलेगा सच? पुलिस ने लोगों से मांगे वीडियो

भरत तिवारी एनकाउंटर: फोन से खुलेगा सच? पुलिस ने लोगों से मांगे वीडियो

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। अब इस पूरे मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए पुलिस जब्त किए गए मोबाइल फोन और फॉरेंसिक जांच का सहारा ले रही है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल डेटा घटना से जुड़े कई अहम तथ्यों का खुलासा कर सकता है। वहीं दूसरी ओर परिजन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि फोन में पुलिस प्रशासन के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं और वे मोबाइल वापस करने की मांग कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार 17 जून की सुबह हुए एनकाउंटर के बाद पुलिस ने भरत तिवारी का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया था। फिलहाल इस मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच एजेंसियां फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, चैट, लोकेशन हिस्ट्री, वीडियो, फोटो और अन्य डिजिटल डेटा की बारीकी से जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद इसका पूरा डेटा न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाएगा।

इस बीच परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मोबाइल फोन में ऐसे कई महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं, जो एनकाउंटर की वास्तविक परिस्थितियों को सामने ला सकते हैं। परिवार ने आशंका जताई है कि कहीं डिजिटल साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो जाए। इसी वजह से वे लगातार मोबाइल फोन वापस करने की मांग कर रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की बात कह रहे हैं।

दूसरी ओर पुलिस ने भी मामले की जांच को पारदर्शी बनाने के लिए आम लोगों से सहयोग मांगा है। पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी यूट्यूबर, सोशल मीडिया यूजर या स्थानीय व्यक्ति के पास घटना से जुड़ा कोई वीडियो या फोटो मौजूद है तो वह उसे जांच टीम को उपलब्ध कराए। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे वीडियो घटनाक्रम को समझने और सच्चाई तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जांच केवल मोबाइल फोन तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार घटना के दौरान इस्तेमाल किए गए तीन पिस्टलों की भी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इनमें निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की पिस्टल, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की पिस्टल तथा भरत तिवारी के पास से बरामद हथियार शामिल है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर किस हथियार से चली गोली भरत तिवारी को लगी थी।

इसके अलावा घटनास्थल से बरामद दो जिंदा कारतूस और खाली खोखों को भी बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ इनका मिलान संबंधित हथियारों से करेंगे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस हथियार का इस्तेमाल हुआ था। जांच रिपोर्ट इस मामले में अहम साक्ष्य साबित हो सकती है।

भरत तिवारी के परिजन शुरुआत से ही इस एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं। उनका आरोप है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए। परिवार ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

वहीं पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और सभी डिजिटल तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण कराया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक आपराधिक जांच में डिजिटल फॉरेंसिक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया वीडियो और बैलिस्टिक रिपोर्ट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य कई मामलों में जांच को सही दिशा देने का काम करते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होता है।

फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस की जांच जारी है। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक रिपोर्ट, हथियारों की बैलिस्टिक जांच और लोगों से मिलने वाले वीडियो इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना से जुड़े कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।

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