‘सामना’ के 50 साल पूरे, मुंबई में होगा फिल्म का विशेष प्रदर्शन; जब्बार पटेल और रामदास फुटाणे करेंगे दर्शकों से संवाद

सामना’ के 50 साल पूरे: मुंबई में होगा विशेष प्रदर्शन, जब्बार पटेल और रामदास फुटाणे करेंगे दर्शकों से संवाद

सामना फिल्म 50 साल पूरे होने के अवसर पर मराठी सिनेमा के इतिहास का एक यादगार अध्याय फिर से जीवंत होने जा रहा है। मराठी फिल्मों की कालजयी कृति ‘सामना’ की गोल्डन जुबली के मौके पर मुंबई में इसका विशेष प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता निळू फुले की स्मृति को समर्पित होगा। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता रामदास फुटाणे और वरिष्ठ फिल्म निर्देशक डॉ. जब्बार पटेल भी मौजूद रहेंगे और दर्शकों के साथ खुलकर बातचीत करेंगे। यह कार्यक्रम न केवल फिल्म प्रेमियों के लिए खास होगा, बल्कि मराठी सिनेमा के इतिहास को करीब से जानने का भी एक सुनहरा अवसर साबित होगा।

यह विशेष आयोजन 18 जुलाई, शनिवार सुबह 11 बजे मुंबई स्थित पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी के लघु नाट्यगृह में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन महाराष्ट्र चित्रपट, रंगभूमी आणि सांस्कृतिक विकास महामंडळ के दादासाहेब फाळके चित्रपट रसास्वाद मंडल की ओर से किया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य मराठी सिनेमा की इस ऐतिहासिक फिल्म को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इसके सामाजिक संदेश को फिर से दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना है।

‘सामना’ मराठी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल है, जिसने अपने दमदार विषय, प्रभावशाली निर्देशन और शानदार अभिनय के दम पर भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाई। यह फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज, सत्ता और व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवालों को बेहद प्रभावी ढंग से बड़े पर्दे पर लेकर आई। यही वजह है कि रिलीज के पांच दशक बाद भी इसकी लोकप्रियता और प्रासंगिकता बरकरार है।

फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार डॉ. जब्बार पटेल ने किया था, जबकि इसकी कहानी देश के जाने-माने नाटककार और लेखक विजय तेंडुलकर ने लिखी थी। फिल्म के संवाद, कथानक और प्रस्तुति ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को प्रभावित किया। वहीं, पंडित भास्कर चंदावरकर द्वारा दिया गया संगीत फिल्म की आत्मा माना जाता है, जिसने इसकी भावनात्मक गहराई को और मजबूत बनाया।

फिल्म में मराठी सिनेमा के दो महान कलाकार डॉ. श्रीराम लागू और निळू फुले मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। दोनों कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से किरदारों को जीवंत बना दिया। इसके अलावा स्मिता पाटिल, मोहन आगाशे और विलास रकटे जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। इन कलाकारों के अभिनय ने ‘सामना’ को भारतीय समानांतर सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।

फिल्म को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। ‘सामना’ को सर्वश्रेष्ठ मराठी फीचर फिल्म सहित 3 राष्ट्रीय पुरस्कार, 7 महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार, 3 फिल्मफेयर पुरस्कार और कुल 25 से अधिक सम्मान प्राप्त हुए। इन उपलब्धियों ने फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया। आज भी फिल्म संस्थानों और सिनेमा प्रेमियों के बीच इसे अध्ययन और चर्चा का विषय माना जाता है।

इस विशेष स्क्रीनिंग की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि फिल्म के निर्माता रामदास फुटाणे और निर्देशक डॉ. जब्बार पटेल दर्शकों के साथ सीधा संवाद करेंगे। वे फिल्म के निर्माण के दौरान के अनुभव, कलाकारों से जुड़े किस्से, पर्दे के पीछे की कहानियां और उस दौर के मराठी सिनेमा के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। दर्शकों को उनसे सीधे सवाल पूछने और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को समझने का भी अवसर मिलेगा।

आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल एक फिल्म की वर्षगांठ मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मराठी सिनेमा की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी है। उनका मानना है कि आज के दौर में क्लासिक फिल्मों को दोबारा बड़े पर्दे पर दिखाना जरूरी है, ताकि युवा दर्शक भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के इतिहास और उसके योगदान को समझ सकें।

मराठी सिनेमा के जानकारों का मानना है कि ‘सामना’ जैसी फिल्मों ने भारतीय समानांतर सिनेमा को नई दिशा दी। फिल्म ने सामाजिक और राजनीतिक विषयों को जिस गंभीरता और ईमानदारी से प्रस्तुत किया, वह आज भी फिल्म निर्माताओं और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यही कारण है कि पांच दशक बाद भी इस फिल्म की चर्चा उतनी ही प्रासंगिक है जितनी इसके रिलीज के समय थी।

आयोजकों ने मराठी सिनेमा के सभी दर्शकों, छात्रों, कलाकारों और फिल्म प्रेमियों से इस विशेष प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि ‘सामना’ की 50वीं वर्षगांठ केवल एक फिल्म का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय और मराठी सिनेमा की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान भी है। यह कार्यक्रम उन सभी लोगों के लिए एक यादगार अनुभव होगा, जिन्होंने इस फिल्म को कभी देखा है या जो पहली बार इस ऐतिहासिक कृति से रूबरू होने जा रहे हैं।

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