RJD छोड़ने के बाद मृत्युंजय तिवारी की अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात, बंद कमरे में हुई अहम चर्चा
मृत्युंजय तिवारी RJD इस्तीफा
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने शुक्रवार को वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात की। यह मुलाकात बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में लंबी बातचीत हुई। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को आरजेडी के अंदरूनी हालात और भविष्य की रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के भीतर अपने साथ हुई कथित उपेक्षा और असंतोष से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अब्दुल बारी सिद्दीकी ने बताया कि मृत्युंजय तिवारी ने अपनी शिकायतें उनके सामने रखीं। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी के भीतर किसी प्रकार की समस्या या असहमति है, तो उसे सार्वजनिक मंच पर लाने से पहले पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाना चाहिए।
सिद्दीकी ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने मृत्युंजय तिवारी को सलाह दी है कि वे अपनी बात सीधे लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के सामने रखें। उनके अनुसार, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संवाद के जरिए कई समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया के माध्यम से विवाद सामने आने से पहले संगठन के भीतर बातचीत बेहतर विकल्प होता।
गौरतलब है कि मृत्युंजय तिवारी ने गुरुवार को आरजेडी के सभी पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। अपने इस्तीफे के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कई बार अपनी समस्याओं से वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई।
मृत्युंजय तिवारी का यह भी कहना था कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी कई अवसरों पर अपनी शिकायतों की जानकारी दी, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनके अनुसार, लंबे समय तक संगठन के लिए पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।
आरजेडी में मृत्युंजय तिवारी का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। वर्ष 2014 में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी का आधिकारिक प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी बनाया था। इसके बाद वे लगभग एक दशक तक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय टीवी चैनलों की बहसों में आरजेडी का पक्ष मजबूती से रखते रहे। अपनी बेबाक शैली और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण वे पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।
इस्तीफे के बाद जारी अपने बयान में मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी और जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने संगठन से कभी कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया और पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसके बावजूद यदि उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा, तो उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
हालांकि, उन्होंने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। इस कारण बिहार की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि वे किसी अन्य दल में शामिल होते हैं या कोई नया राजनीतिक फैसला लेते हैं, तो इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, अब्दुल बारी सिद्दीकी के साथ उनकी मुलाकात ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि, बैठक के बाद दोनों नेताओं की ओर से किसी बड़े राजनीतिक फैसले का संकेत नहीं दिया गया। सिद्दीकी ने साफ किया कि उन्होंने केवल संगठन के भीतर संवाद बनाए रखने और पार्टी नेतृत्व से सीधे बातचीत करने की सलाह दी है।
बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच आरजेडी के भीतर यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ और लंबे समय तक मीडिया का चेहरा रहे नेता का इस्तीफा निश्चित रूप से संगठन के लिए चुनौती माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या पार्टी नेतृत्व मृत्युंजय तिवारी से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश करेगा या फिर यह दूरी आगे और बढ़ेगी।
फिलहाल, मृत्युंजय तिवारी की अब्दुल बारी सिद्दीकी से हुई मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में उनके अगले राजनीतिक कदम और आरजेडी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

