पत्नी के डर से पति ने DM से लगाई गुहार, बोले- साहब मेरी जान बचा लीजिए
पत्नी के डर से पति ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में जिलाधिकारी (DM) से अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाई है। जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान सामने आया यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। आमतौर पर घरेलू हिंसा की शिकायतें महिलाओं की ओर से सामने आती हैं, लेकिन इस मामले में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी पत्नी और परिवार के कुछ सदस्यों पर मारपीट, धमकी और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मामले की जांच के आदेश देते हुए इसे प्रोबेशन विभाग को भेज दिया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी शादी को करीब 41 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि पूरी जिंदगी उन्होंने परिवार की खुशहाली के लिए मेहनत की। खेती की जमीन बेचकर मकान बनवाया, बच्चों की पढ़ाई पूरी कराई और तीनों बेटों की शादी भी कराई। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर जमीन भी खरीदी। उनका कहना है कि वर्षों तक परिवार के लिए सब कुछ करने के बावजूद अब उन्हें अपने ही घर में अपमान और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी अक्सर उनके साथ मारपीट करती है, गाली-गलौज करती है और कई बार जूतों से भी पीट चुकी है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे इस व्यवहार से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है और प्रशासन उन्हें सुरक्षा प्रदान करे।
आवेदन में बुजुर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पत्नी उन्हें अक्सर धमकी देती है। उनके अनुसार, पत्नी कहती है कि वह उन्हें घर से दूर भिजवा देगी या उनके हाथ-पैर तुड़वा देगी। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन धमकियों के कारण वह लगातार भय और तनाव में जीवन बिता रहे हैं।
बुजुर्ग ने अपनी शिकायत में एक अन्य आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जब किसी दूसरे व्यक्ति का फोन उनकी पत्नी के पास आता है तो उनका व्यवहार संदिग्ध लगता है, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा होती है। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाए ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।
शिकायत केवल पत्नी तक सीमित नहीं है। बुजुर्ग ने परिवार के कुछ अन्य सदस्यों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, परिवार के कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उनकी झोपड़ी गिरा दी और उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण उन्हें अब पनकी स्थित एक रैन बसेरे में रहना पड़ रहा है।
बुजुर्ग ने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर अपने ही घर से बेघर होना उनके लिए सबसे बड़ा दुख है। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा परिवार की भलाई के लिए काम किया, लेकिन अब उन्हें न्याय और सुरक्षा के लिए प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शिकायत का संज्ञान लिया है। उन्होंने आवेदन को प्रोबेशन विभाग के पास भेजते हुए अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
फिलहाल इस मामले में केवल शिकायतकर्ता के आरोप सामने आए हैं। पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि घरेलू विवादों में किसी भी पक्ष की शिकायत को गंभीरता से सुनना और निष्पक्ष जांच करना आवश्यक है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

