Supreme Court on BCI: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, BCI के हर अहम फैसले में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की होगी भागीदारी

Supreme Court on BCI: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, BCI के हर अहम फैसले में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की होगी भागीदारी

नई दिल्ली। Supreme Court on BCI मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि जब तक नई निर्वाचित बार काउंसिल ऑफ इंडिया का गठन नहीं हो जाता, तब तक BCI के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सक्रिय रूप से शामिल किया जाए। दोनों को संबंधित बैठकों में भी बुलाने का निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश BCI के पुनर्गठन और उसके मौजूदा नेतृत्व के कार्यकाल को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया। अदालत ने फिलहाल BCI के पुनर्गठन पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा कि पहले राज्य बार काउंसिलों की चुनावी और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। इसके बाद BCI के पुनर्गठन के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।

⚖️ BCI के बड़े फैसलों में AG और SG की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई निर्वाचित BCI के गठन तक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी के साथ लिया जाना चाहिए।

अदालत ने BCI के इस रुख को भी रिकॉर्ड किया कि अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों से पहले शामिल किया जाएगा। वहीं, रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रखा जा सकता है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा BCI नेतृत्व को नई BCI के गठन तक नियमित कामकाज संभालने की अनुमति है, लेकिन इसे स्थायी कार्यकाल की मंजूरी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

🏛️ राज्य बार काउंसिलों को चुनाव पूरा करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नई BCI के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राज्य बार काउंसिलों को भी समयसीमा के साथ निर्देश दिए हैं।

नई गठित राज्य बार काउंसिलों को अपने चेयरपर्सन, वाइस चेयरपर्सन और अन्य पदाधिकारियों के साथ-साथ BCI के लिए अपने प्रतिनिधि का चुनाव करना होगा। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक राज्य बार काउंसिल की संरचना अधिसूचित होने के बाद निर्धारित अवधि में यह चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

राज्य बार काउंसिलों को चुनाव और अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी होगी। इन रिपोर्टों के मिलने के बाद अदालत BCI के पुनर्गठन के मुद्दे पर आगे विचार करेगी।

👩‍⚖️ महिला सदस्यों के को-ऑप्शन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों की संरचना पूरी करने की प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से राज्य बार काउंसिलों में दो महिला सदस्यों के को-ऑप्शन की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करने का अनुरोध किया गया है।

इसके बाद राज्य बार काउंसिलों को अपनी संरचना अधिसूचित करनी होगी और फिर नए पदाधिकारियों तथा BCI प्रतिनिधि का चुनाव करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही BCI के पुनर्गठन की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।

❓ BCI चेयरमैन के पांच साल के कार्यकाल पर सवाल

सुनवाई के दौरान BCI चेयरमैन मानन कुमार मिश्रा और वाइस चेयरमैन के कार्यकाल को दो साल से बढ़ाकर पांच साल करने वाली अधिसूचना पर भी सवाल उठे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि BCI Rules के Rule 12(2) के तहत चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का कार्यकाल दो साल निर्धारित है। ऐसे में अप्रैल 2025 की अधिसूचना के जरिए कार्यकाल को 2030 तक बढ़ाने का कानूनी आधार क्या है, इस पर सवाल उठाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाया कि क्या कोई अधिसूचना नियमों में निर्धारित कार्यकाल को पार कर सकती है। हालांकि अदालत ने इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।

🧐 मौजूदा BCI चेयरमैन को लेकर क्या कहा कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को BCI चेयरमैन मानन कुमार मिश्रा के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश जारी नहीं किया। अदालत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था नई BCI के गठन और चुनाव तक नियमित कामकाज के लिए जारी रह सकती है।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसे वर्ष 2030 तक चेयरमैन के कार्यकाल की अंतिम मंजूरी नहीं माना जा सकता। BCI के पुनर्गठन और चेयरमैन के कार्यकाल से जुड़े सवालों पर राज्य बार काउंसिलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विचार किया जाएगा।

📋 सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होंगी अनुपालन रिपोर्ट

राज्य बार काउंसिलों को अपने स्तर पर पूरी की गई चुनावी प्रक्रिया और निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी होगी। इन रिपोर्टों के आधार पर अदालत आगे BCI के पुनर्गठन पर विचार करेगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य नई निर्वाचित BCI के गठन का रास्ता साफ करना है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर बार काउंसिल की व्यवस्था नए निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से आगे बढ़ सके।

📅 अगली सुनवाई में हो सकता है आगे का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद BCI के पुनर्गठन के मुद्दे पर विचार करने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होने की जानकारी सामने आई है।

फिलहाल कोर्ट का जोर राज्य बार काउंसिलों की प्रक्रिया को पूरा कराने और नई BCI के गठन का रास्ता तैयार करने पर है। वहीं BCI चेयरमैन के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने वाली अधिसूचना की वैधता का सवाल अभी खुला हुआ है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के निर्देशों से BCI के कामकाज में महत्वपूर्ण बदलाव की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। नई निर्वाचित BCI के गठन तक अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही राज्य बार काउंसिलों को चुनाव और प्रतिनिधि चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करनी होगी। अब आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि BCI का पुनर्गठन किस तरह होता है और चेयरमैन के पांच साल के कार्यकाल से जुड़े विवाद पर अदालत क्या फैसला देती है।

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