BRICS गाला डिनर के शाकाहारी मेन्यू पर छिड़ी बहस, हर्ष गोयनका ने की भारतीय व्यंजनों की तारीफ
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित गाला डिनर का शाकाहारी मेन्यू इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत मंडपम में आयोजित इस खास रात्रिभोज में ब्रिक्स देशों से आए नेताओं और मेहमानों को पूरी तरह शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे गए। मेन्यू में भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के पारंपरिक स्वादों को शामिल किया गया था। हालांकि, डिनर में नॉन-वेज व्यंजन नहीं परोसे जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ब्रिक्स गाला डिनर के शाकाहारी मेन्यू को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया पर भारतीय नॉन-वेज भोजन की तारीफ करते हुए कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग मांसाहारी भोजन करते हैं। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में अपनी बहन के बनाए छोले-भटूरे का भी जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर ब्रिक्स डिनर का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे गाला डिनर के मेन्यू से जोड़कर देखा गया। उनकी टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। <Cite refs={[“turn0search0″,”turn0search5”]} />
इसी बीच उद्योगपति हर्ष गोयनका ने भारतीय शाकाहारी भोजन के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स डिनर में परोसे गए शाकाहारी मेन्यू की आलोचना समझ से परे है। हर्ष गोयनका के अनुसार, भारत का शाकाहारी भोजन बेहद समृद्ध, विविध और स्वादिष्ट है। उन्होंने भारतीय शाकाहारी संस्कृति को दुनिया के सामने पेश किए जाने को गर्व की बात बताया। अपने मजाकिया अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि काश उन्हें भी इस शानदार डिनर में शामिल होने का मौका मिलता।
ब्रिक्स डिनर में क्या-क्या परोसा गया?
ब्रिक्स गाला डिनर के मेन्यू में 10 से ज्यादा खास शाकाहारी व्यंजन शामिल किए गए थे। मेहमानों के लिए स्टार्टर से लेकर मुख्य भोजन और डेजर्ट तक, भारतीय खान-पान की विविधता को ध्यान में रखते हुए व्यंजन तैयार किए गए थे।
स्टार्टर में गुजरात की मशहूर खांडवी मिले-फ्यूई और अवध शैली के खुंब गलौटी कबाब शामिल थे। खांडवी गुजरात का पारंपरिक व्यंजन है, जिसे इस डिनर में आधुनिक अंदाज में पेश किया गया। वहीं, खुंब गलौटी कबाब मशरूम से तैयार किया गया एक खास शाकाहारी व्यंजन था, जिसे गलौटी कबाब की शैली में परोसा गया।
मुख्य भोजन में पनीर लबाबदार को शामिल किया गया। यह उत्तर भारतीय व्यंजनों में लोकप्रिय पनीर की एक समृद्ध और स्वादिष्ट डिश है। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाले दुर्लभ मशरूम यानी गुच्छी से तैयार की गई गुच्छी मार्मिक डिश भी मेन्यू का हिस्सा रही। गुच्छी को भारत के पहाड़ी क्षेत्रों का खास खाद्य पदार्थ माना जाता है और इसकी कीमत भी आम मशरूम की तुलना में काफी अधिक होती है।
मेन्यू में कैरट बीन पोरियाल भी शामिल था। यह दक्षिण भारतीय शैली की सब्जी है, जिसमें गाजर और बीन्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ टमाटर और दाल का हल्का सूप, जिसे थक्काली बेले सारू के रूप में जाना जाता है, भी परोसा गया। इसके अलावा मेहमानों को मिलेट पुलाव, चुकंदर का रायता और कई तरह की भारतीय रोटियां दी गईं। मेन्यू में मिलेट यानी मोटे अनाज को शामिल करना भारत की पारंपरिक और पौष्टिक खान-पान की ओर भी संकेत करता है। <Cite refs={[“turn0search5″,”turn0search6”]} />
डेजर्ट में भी दिखी भारतीय मिठास
ब्रिक्स गाला डिनर के डेजर्ट सेक्शन में भी भारतीय स्वाद और स्थानीय परंपराओं को प्रमुखता दी गई। मेहमानों को पुरानी दिल्ली की मशहूर फ्रूट क्रीम विद जलेबी परोसी गई। इस डेजर्ट में ठंडी फ्रूट क्रीम और गरमा-गरम जलेबी का अनोखा मेल देखने को मिला।
इसके अलावा शहतूत फिरनी भी मेन्यू का हिस्सा रही। फिरनी भारतीय उपमहाद्वीप की पारंपरिक मिठाई है, जिसे चावल और दूध से तैयार किया जाता है। इसमें शहतूत का स्वाद जोड़कर इसे एक अलग और खास रूप दिया गया। इस तरह डेजर्ट में भी पुरानी दिल्ली, उत्तर भारत और भारतीय पारंपरिक मिठाइयों की झलक दिखाई दी।
मेन्यू को लेकर क्यों हुई बहस?
ब्रिक्स डिनर के शाकाहारी मेन्यू को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने भारत के शाकाहारी भोजन की समृद्ध परंपरा पेश करना गर्व की बात है। भारत में शाकाहारी व्यंजनों की बहुत लंबी परंपरा है और देश के अलग-अलग राज्यों में सैकड़ों तरह के पारंपरिक शाकाहारी भोजन बनाए जाते हैं।
वहीं, कुछ लोगों का सवाल है कि भारत की पहचान केवल शाकाहारी भोजन तक सीमित नहीं है। भारतीय खान-पान में नॉन-वेज व्यंजनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मछली, चिकन, मटन और अन्य मांसाहारी व्यंजन पारंपरिक भोजन का हिस्सा हैं। ऐसे में कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत की खाद्य विविधता को दिखाने के लिए शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्प रखे जा सकते थे।
कांग्रेस नेताओं ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के समर्थकों ने शाकाहारी मेन्यू का बचाव किया। उनका कहना है कि डिनर में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के स्वाद, पोषण और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया था। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कांग्रेस की आलोचना को भोजन पर राजनीति करने से जोड़कर देखा और कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया। <Cite refs={[“turn0news14″,”turn0search4″,”turn0search8”]} />
भारतीय भोजन की वैश्विक पहचान
ब्रिक्स गाला डिनर का मेन्यू एक बार फिर यह दिखाता है कि भारतीय भोजन कितना विविध और समृद्ध है। भारत में हर राज्य, हर क्षेत्र और कई समुदायों की अपनी अलग खान-पान की परंपरा है। गुजरात की खांडवी, उत्तर भारत का पनीर, हिमालय की गुच्छी, दक्षिण भारत का पोरियाल और भारतीय मिठाइयां देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
हर्ष गोयनका की प्रतिक्रिया इसी बात पर जोर देती है कि भारतीय शाकाहारी भोजन को दुनिया के सामने रखना किसी भी तरह से कमतर नहीं है। वहीं, राहुल गांधी की टिप्पणी ने यह सवाल खड़ा किया है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की खाद्य विविधता को किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, ब्रिक्स गाला डिनर का शाकाहारी मेन्यू अब केवल भोजन तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है। यह भारतीय संस्कृति, खान-पान की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय विविधता और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के बीच एक बात साफ है कि भारतीय भोजन—चाहे वह शाकाहारी हो या मांसाहारी—अपनी विविधता, स्वाद और परंपरा के कारण दुनिया भर में खास पहचान रखता है।

