Jharkhand Governor: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने Ekal Abhiyan के योगदान को सराहा
Jharkhand Governor: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने Ekal Abhiyan के योगदान को सराहा
Jharkhand Governor संतोष कुमार गंगवार ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को धनबाद स्थित IIT-ISM में आयोजित Ekal Abhiyan के आचार्य एवं व्यास सम्मान समारोह को संबोधित किया। इस दौरान राज्यपाल ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज के दूर-दराज क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में एकल अभियान की भूमिका की सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि समाज के ऐसे हिस्सों तक शिक्षा और जागरूकता पहुंचाना, जहां अभी भी कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं, सामाजिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एकल अभियान सिर्फ शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से आरोग्य, विकास, जागरण और संस्कार को भी समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
धनबाद से शुरू हुई Ekal Vidyalaya की यात्रा
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि Ekal Vidyalaya Abhiyan की यात्रा धनबाद की धरती से शुरू हुई। उन्होंने स्वर्गीय मदनलाल अग्रवाल के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा की ज्योति जलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया प्रयास आज एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है।
उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति या संस्था द्वारा लिया गया संकल्प, जब समाज का सहयोग और लोगों का निरंतर प्रयास मिलता है, तो वह बड़े सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।
राज्यपाल के अनुसार एकल अभियान की यात्रा इसी बात का उदाहरण है कि समर्पण, निरंतरता और सामाजिक सहभागिता के जरिए दूर-दराज क्षेत्रों तक सकारात्मक बदलाव पहुंचाया जा सकता है।
Education के साथ संस्कार भी जरूरी
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने शिक्षा के साथ संस्कार और जीवन-मूल्यों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सक्षम बनाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। केवल किताबी ज्ञान किसी व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और अपनी संस्कृति के प्रति समझ भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एकल श्रीहरि संस्कार शिक्षा के माध्यम से हरिकथा, सत्संग, परिवार मंगल और विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों के जरिए लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
दूर-दराज के गांवों तक पहुंच रही शिक्षा
राज्यपाल ने कहा कि ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा एवं जागरूकता के प्रसार का असर सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव उनके परिवारों और पूरे समुदाय पर पड़ता है।
शिक्षा के माध्यम से बच्चों के भविष्य के लिए नई संभावनाएं पैदा होती हैं। साथ ही परिवारों में आत्मविश्वास बढ़ता है और समुदाय के विकास के नए रास्ते खुलते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाना समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। इसके लिए सरकार के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
Harikatha और Satsang की परंपरा का उल्लेख
राज्यपाल ने भारतीय परंपरा में कथा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में कथा के माध्यम से ज्ञान, अनुभव और जीवन-मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की समृद्ध परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि एक अच्छा कथाकार केवल कथा का वाचन नहीं करता, बल्कि अपने विचारों और प्रेरक प्रसंगों के जरिए लोगों को जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है।
इसी दृष्टि से गांव-गांव जाकर हरिकथा, सत्संग और सामाजिक चेतना का प्रसार करने वाले व्यास कथाकारों के योगदान को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने कहा कि ऐसे कथाकार लोगों के बीच जाकर केवल धार्मिक या सांस्कृतिक विषयों की जानकारी नहीं देते, बल्कि सामाजिक मूल्यों और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करने का काम करते हैं।
Jharkhand की Tribal Culture को बताया विशेष पहचान
अपने संबोधन में राज्यपाल ने झारखंड की समृद्ध जनजातीय परंपरा और लोक संस्कृति का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि Jharkhand की Tribal Culture और सामुदायिक जीवन इसकी विशिष्ट पहचान हैं। प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता और सामाजिक सहभागिता यहां की जीवन-पद्धति के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और जीवन-मूल्यों का संरक्षण करना भी सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है, ताकि आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ समाज की पारंपरिक पहचान भी बनी रहे।
Social Organizations की भागीदारी जरूरी
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि समाज का समग्र विकास केवल सरकारों के प्रयास से संभव नहीं है।
इसके लिए सामाजिक संस्थाओं, संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक संगठन और नागरिक भी अपनी भूमिका निभाते हैं, तो विकास का प्रभाव ज्यादा व्यापक हो सकता है।
एकल अभियान जैसे सामाजिक प्रयासों को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि ऐसे अभियान समाज के उन क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास करते हैं जहां सरकारी या अन्य संस्थागत सुविधाओं की पहुंच सीमित हो सकती है।
आचार्य और व्यास कथाकारों का सम्मान
IIT-ISM धनबाद में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एकल अभियान के आचार्यों एवं व्यास कथाकारों का सम्मान करना था।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों के कार्यों को रेखांकित किया गया।
राज्यपाल ने ऐसे लोगों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समर्पित होकर काम करने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ सामाजिक चेतना और संस्कार को आगे बढ़ाने का काम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
समग्र विकास के लिए सामूहिक प्रयास
राज्यपाल के संबोधन का मुख्य संदेश शिक्षा, संस्कार, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता के बीच संतुलन पर केंद्रित रहा।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं मापा जा सकता। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास भी जरूरी है।
झारखंड जैसे राज्य में, जहां जनजातीय परंपराओं और सामुदायिक जीवन की समृद्ध विरासत है, आधुनिक विकास के साथ इन मूल्यों को संरक्षित करना महत्वपूर्ण है।
धनबाद में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से एकल अभियान की ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों तक शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता पहुंचाने की भूमिका को सामने रखा गया। राज्यपाल ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहभागिता को समाज के सकारात्मक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

