झारखंड में बालू संकट की शुरुआत: 15 अक्टूबर तक 444 बालू घाट बंद, निर्माण कार्य और कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर
10 जून 2026 | रांची, झारखंड
झारखंड में आज यानी 10 जून 2026 से बालू संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के तहत राज्य की सभी नदियों से बालू खनन पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यह प्रतिबंध 15 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके चलते राज्य के सभी 444 बालू घाटों पर खनन और बालू उठाव की गतिविधियां पूरी तरह बंद हो गई हैं।
हर साल मानसून के दौरान नदियों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बालू खनन पर रोक लगाई जाती है। लेकिन इस बार पर्याप्त भंडारण नहीं हो पाने के कारण राज्य में बालू की कमी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
सरकार की तैयारी अधूरी रह गई
राज्य सरकार ने प्रतिबंध लागू होने से पहले बालू का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने की योजना बनाई थी। इसके तहत करीब 35 बालू घाटों से नियमित आपूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरी, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अन्य तकनीकी कारणों से यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।
जानकारी के मुताबिक, केवल 14 घाटों से ही नियमित रूप से बालू उठाव हो पाया। इनमें मुख्य रूप से रांची, दुमका, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और हजारीबाग जिलों के कुछ घाट शामिल थे। सीमित आपूर्ति के कारण राज्यभर में पर्याप्त भंडारण नहीं हो सका।
निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है सीधा असर
राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में इस समय सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाएं तेजी से चल रही हैं। सड़क, पुल, आवास, सरकारी भवन और निजी मकानों के निर्माण में बालू एक महत्वपूर्ण सामग्री है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले चार महीनों तक बालू की उपलब्धता कम रहने से कई परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है। छोटे ठेकेदारों, मकान निर्माण करा रहे लोगों और निर्माण कंपनियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बालू की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत
प्रतिबंध लागू होने से पहले ही बाजार में बालू की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलने लगे हैं। कई जिलों से निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की निर्माण लागत पर पड़ेगा।
कालाबाजारी और अवैध खनन की आशंका
प्रतिबंध लागू होने से पहले कई घाट संचालकों और ठेकेदारों ने बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण किया है। हालांकि इसके बावजूद कालाबाजारी, अवैध परिवहन और अवैध खनन की आशंकाएं बनी हुई हैं।
पिछले वर्षों में भी प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध बालू कारोबार के कई मामले सामने आए थे। इस बार भी प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।
प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
खनन विभाग और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान यदि कोई व्यक्ति या संस्था अवैध उत्खनन, परिवहन या भंडारण करती पाई गई तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राज्यभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस, खनन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखेंगी ताकि अवैध खनन को रोका जा सके।
क्या होगा असर?
- 15 अक्टूबर 2026 तक सभी 444 बालू घाट बंद रहेंगे।
- निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है।
- बालू की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना।
- मकान निर्माण की लागत बढ़ सकती है।
- कालाबाजारी और अवैध परिवहन पर प्रशासन की कड़ी नजर।
- सरकारी परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।

