पूरी जिंदगी पैसे और गांधी परिवार के पीछे भागते रहे… कपिल सिब्बल पर अचानक क्यों BJP हो गई हमलावर?

देश में कुछ सेलिब्रिटीज के बाद अब देश के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के ‘भारत में रहने पर शर्म आने’ वाले बयान पर बीजेपी हमलावर हो गई है. BJP नेता और पश्चिम बंगाल में कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष ने सिब्बल पर करारा तंज करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी गांधी परिवार के पीछे-पीछे बिता दी. खुद अपनी जिंदगी पैसे के पीछे भागने में बर्बाद कर दी. अब यहां रहने में शर्म आ रही है. उन्होंने सिब्बल को ऑफर दिया कि वे बंगाल आएं और यहां सड़क किनारे किसी दुकान में बैठक चाय पिएं.

वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद Kapil Sibal एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। हाल के दिनों में बीजेपी नेताओं ने उन पर तीखे हमले किए हैं और आरोप लगाया है कि उन्होंने “पूरी जिंदगी पैसे और गांधी परिवार के पीछे भागते हुए राजनीति की है।” यह विवाद तब और बढ़ गया जब सिब्बल ने कुछ मामलों में केंद्र सरकार, जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उनके बयानों को लेकर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि सिब्बल लगातार विपक्षी दलों और उन नेताओं का बचाव करते रहे हैं, जिन पर भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर आरोप लगे हैं।

दरअसल, कपिल सिब्बल लंबे समय तक Indian National Congress के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं और गांधी परिवार के बेहद करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती रही है। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस से दूरी बनाई और एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश की, लेकिन बीजेपी का आरोप है कि उनकी राजनीति और सार्वजनिक हस्तक्षेप हमेशा कांग्रेस तथा गांधी परिवार के हितों के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं। यही वजह है कि जब भी सिब्बल केंद्र सरकार या बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाते हैं, सत्ताधारी दल उनके पुराने राजनीतिक संबंधों को मुद्दा बनाकर जवाब देता है।

हालिया विवाद में बीजेपी नेताओं ने सिब्बल के कुछ बयानों को “देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला” बताते हुए उन पर निशाना साधा। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता मोदी सरकार का विरोध करते-करते देश की संस्थाओं पर भी सवाल खड़े करने लगते हैं। वहीं सिब्बल का पक्ष यह है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष और नागरिक समाज की जिम्मेदारी है। वे पहले भी चुनावी बॉन्ड, संसद की कार्यप्रणाली और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि वैचारिक भी है। एक तरफ बीजेपी सिब्बल को कांग्रेस युग की राजनीति का प्रतीक बताती है, तो दूसरी ओर सिब्बल खुद को संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्ष की आवाज के रूप में पेश करते हैं। ऐसे में उनके हर बयान पर सियासी बहस तेज होना स्वाभाविक है। आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा के भीतर तथा बाहर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमलावर नजर आ रहे हैं।

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