चीन के विदेश मंत्री से मिले एस जयशंकर, बोले- सीमा पर शांति से ही सामान्य होंगे भारत-चीन रिश्ते
Jaishankar China Meeting: भारत और चीन के रिश्तों को लेकर एक अहम कूटनीतिक बैठक फिलीपींस में हुई। इसके बाद हिंदी में पूरा लेख…
जयशंकर चीन बैठक एक बार फिर भारत-चीन संबंधों को लेकर चर्चा का केंद्र बन गई है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित ईस्ट एशिया समिट (EAS) और आसियान रीजनल फोरम (ARF) की बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से द्विपक्षीय मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, द्विपक्षीय संबंध, व्यापार, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और चीन के संबंध तभी सामान्य हो सकते हैं, जब सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहे।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन एशिया की दो प्रमुख शक्तियां हैं और दोनों देशों के बीच स्थिर तथा सकारात्मक संबंध पूरे क्षेत्र की शांति और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का आधार आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता होना चाहिए। यदि इन तीन सिद्धांतों का ईमानदारी से पालन किया जाए, तो न केवल भारत और चीन के संबंध बेहतर होंगे, बल्कि एक मजबूत और बहुध्रुवीय एशिया के निर्माण में भी मदद मिलेगी।
जयशंकर ने अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में हुई दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस बैठक के बाद से दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। कई स्तरों पर बातचीत बढ़ी है और दोनों पक्ष संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक प्रगति तभी संभव होगी, जब सीमा पर शांति बनी रहे और दोनों देश पहले हुए समझौतों का पूरी तरह पालन करें।
बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत और चीन के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों बड़े पड़ोसी देश हैं और उनके अपने-अपने राष्ट्रीय हित हैं। लेकिन इन मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकना दोनों देशों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच पहले भी इस बात पर सहमति बनी थी कि मतभेदों को संवाद और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाएगा। इसलिए बातचीत और विश्वास कायम रखना सबसे जरूरी है।
भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में कुछ सकारात्मक कदम भी देखने को मिले हैं। जयशंकर ने सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की दिशा में हुई प्रगति, वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और सीमा व्यापार को दोबारा शुरू करने जैसे फैसलों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये कदम दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और विश्वास बहाल करने में मदद करेंगे।
हालांकि विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अभी कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों को आगे काम करने की जरूरत है। उन्होंने निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन की स्थिरता और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तभी मजबूत होंगे, जब व्यापार में पारदर्शिता और संतुलन सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस वर्ष भारत ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता कर रहा है। इस अवसर पर जयशंकर ने भारत की अध्यक्षता के दौरान विभिन्न ब्रिक्स गतिविधियों में चीन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और ऐसे समय में प्रमुख देशों के बीच संवाद और सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत और चीन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों से गुजरे हैं। विशेष रूप से पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी ठंडापन आ गया था। इसके बाद सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई, जिनका उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना और विश्वास बहाल करना रहा। हाल के समय में दोनों देशों ने संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन के बीच संबंध केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका प्रभाव पूरे एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसलिए दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि वे विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाएं और सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश करें।
फिलीपींस में हुई यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन लगातार संवाद और उच्चस्तरीय बैठकों से भविष्य में संबंधों के और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान ने एक बार फिर भारत की स्पष्ट नीति को सामने रखा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की सबसे पहली शर्त है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताएं इस दिशा में कितनी सफल रहती हैं, इस पर पूरे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

