Delhi NCR Subvention Scam: होम बायर्स को राहत की उम्मीद
Delhi NCR Subvention Scam: होम बायर्स को राहत की उम्मीद
दिल्ली-एनसीआर में होम बायर्स के साथ कथित ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने AVJ डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की।
यह कार्रवाई सीबीआई की एफआईआर के आधार पर दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है। जांच का केंद्र तथाकथित सबवेंशन स्कीम और ‘नो EMI टिल पजेशन’ मॉडल है, जिसके जरिए हजारों खरीदारों को फ्लैट बुक कराने के लिए आकर्षित किए जाने का आरोप है।
क्या है सबवेंशन स्कीम का आरोप?
जांच एजेंसियों के अनुसार, बिल्डर कंपनियों ने खरीदारों को यह भरोसा दिलाया कि:
- 🏢 फ्लैट का कब्जा मिलने तक EMI बिल्डर भरेगा
- 🏦 खरीदार बैंक से होम लोन लेकर फ्लैट बुक कर सकते हैं
- 📄 परियोजना तय समय में पूरी कर दी जाएगी
लेकिन आरोप है कि कई परियोजनाएं वर्षों तक पूरी नहीं हुईं, जबकि बैंक लोन जारी हो चुके थे। नतीजतन खरीदारों पर EMI और ब्याज का भारी बोझ बढ़ता गया।
किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
ईडी की कार्रवाई मुख्य रूप से इन दो कंपनियों से जुड़े मामलों में हुई है:
- AVJ Developers India Pvt. Ltd.
- Rudra Buildwell Construction Pvt. Ltd.
एजेंसी इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
सीबीआई की एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले में सीबीआई ने 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की थी। उसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट में कई होम बायर्स ने शिकायत की थी कि उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला, जबकि बैंक उनसे लगातार EMI वसूल रहे हैं।
बिल्डर-बैंक गठजोड़ की भी जांच
ईडी अब सिर्फ बिल्डरों की भूमिका तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं बिल्डर और बैंक अधिकारियों के बीच मिलीभगत तो नहीं थी।
जांच के प्रमुख बिंदु:
- 💰 होम लोन की रकम किस खाते में गई?
- 🔄 क्या पैसा दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया गया?
- 🏠 क्या परियोजना निर्माण के बजाय धन का उपयोग अन्य संपत्तियों में किया गया?
- 📑 बैंक ने लोन जारी करते समय आवश्यक निगरानी की थी या नहीं?
होम बायर्स की सबसे बड़ी परेशानी
सबवेंशन स्कीम में फंसे कई खरीदारों का कहना है कि:
- उन्हें फ्लैट नहीं मिला
- बैंक लगातार EMI और ब्याज वसूल रहे हैं
- बिल्डर द्वारा EMI भुगतान का वादा पूरा नहीं किया गया
- कानूनी लड़ाई में वर्षों से फंसे होने के कारण आर्थिक संकट बढ़ गया है
दिल्ली-एनसीआर में ऐसी योजनाओं से जुड़े मामलों को पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर की सबसे बड़ी समस्याओं में गिना गया है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर पूरे एनसीआर रियल एस्टेट बाजार पर पड़ सकता है। इससे:
- खरीदारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है
- सबवेंशन मॉडल पर सख्त निगरानी बढ़ सकती है
- बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर के बीच वित्तीय पारदर्शिता की मांग तेज हो सकती है
आगे क्या हो सकता है?
ईडी की छापेमारी के बाद एजेंसी:
- डिजिटल रिकॉर्ड जब्त कर सकती है
- बैंक खातों को खंगाल सकती है
- संदिग्ध संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर सकती है
- कंपनी निदेशकों और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है
सूत्रों के अनुसार, जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे भी अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
Delhi NCR Subvention Scam से जुड़ी ईडी की यह कार्रवाई उन हजारों होम बायर्स के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्होंने ‘नो EMI टिल पजेशन’ जैसी योजनाओं पर भरोसा करके फ्लैट बुक किए थे।
अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि होम लोन की रकम का वास्तविक इस्तेमाल कैसे हुआ, क्या उसमें धन शोधन के तत्व मौजूद थे, और क्या खरीदारों को सुनियोजित तरीके से गुमराह किया गया।
इस मामले की आगे की जांच दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत साबित हो सकती है।

