Ram Mandir Donation Controversy: चंपत राय के कथित पत्र से नया खुलासा, दान गिनती के नियमों पर उठे सवाल
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी से जुड़े मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय के नाम से एसआईटी को लिखा गया एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में दावा किया गया है कि दान की गिनती के लिए बनाई गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों द्वारा तैयार की गई थी तथा उस दस्तावेज पर केवल उनके हस्ताक्षर थे। हालांकि इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है।
वायरल कथित पत्र के अनुसार 6 फरवरी 2025 को राम मंदिर में प्राप्त दान की गणना और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित दिशा-निर्देश तैयार किए गए थे। इस दस्तावेज पर ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक, अयोध्या शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर बताए गए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि उस समय चंपत राय के हस्ताक्षर नहीं कराए गए, जबकि वे ट्रस्ट के महासचिव थे और अगस्त 2020 से जून 2026 तक ट्रस्ट के अधिकांश महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर होते रहे थे।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि चंपत राय को इस SOP की जानकारी जून 2026 में मिली। कथित तौर पर उन्होंने इस प्रक्रिया को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और सवाल उठाया कि यदि वे उस समय अयोध्या में मौजूद नहीं थे तो उनके लौटने का इंतजार क्यों नहीं किया गया। पत्र में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट के इतने महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय में महासचिव की भूमिका को नजरअंदाज किया गया।
इसी बीच दान चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी दान की गिनती की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट द्वारा सुरक्षा और गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई हैं।
एसआईटी की जांच के अनुसार राम मंदिर ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि दान की राशि की गिनती, उसकी सुरक्षा और बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की प्राथमिक जिम्मेदारी ट्रस्ट की होगी। इसके तहत गणना कक्ष में प्रवेश करने वाले सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा जांच अनिवार्य रखी गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।
जांच एजेंसी का कहना है कि बाद में फरवरी 2025 में जारी संशोधित निर्देशों के तहत इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। नियमित सुरक्षा जांच के स्थान पर केवल रैंडम तलाशी का प्रावधान लागू कर दिया गया। एसआईटी का मानना है कि इसी बदलाव के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं और इस पहलू की विस्तृत जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दल ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित पत्र को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि चंपत राय के नाम से वायरल हो रहे पत्र की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में उसमें किए गए दावों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। दूसरी ओर एसआईटी अपनी जांच जारी रखे हुए है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में प्राप्त दान की गणना और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और नियमबद्ध होनी चाहिए। इससे न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होता है, बल्कि किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना भी कम होती है।
अब पूरे मामले में सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और राम मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल पत्र में किए गए दावों में कितनी सच्चाई है और दान प्रबंधन प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

