Hapur RSS Leader Death मामले में सतीश कुमार की ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से मौत हुई। परिजनों ने पुरानी रंजिश और खनन माफिया पर हत्या का आरोप लगाया है।
हापुड़ में RSS नेता की मौत पर बवाल, परिजनों ने खनन माफिया पर लगाया हत्या का आरोप
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में अवैध मिट्टी खनन और तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। हाफिजपुर थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव में मिट्टी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पदाधिकारी और किसान सतीश कुमार की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया और एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
परिजनों ने इस घटना को महज सड़क हादसा मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि सतीश कुमार की पुरानी रंजिश के चलते जानबूझकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हत्या की गई। हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला दुर्घटना का है या फिर इसके पीछे किसी साजिश की भूमिका है। पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
घर के बाहर खड़े थे सतीश कुमार
रिपोर्टों के मुताबिक, घटना सोमवार देर शाम हाफिजपुर थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव में हुई। सतीश कुमार अपने घर के बाहर मौजूद थे। इसी दौरान मिट्टी से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली वहां से गुजरी और उनकी चपेट में आ गई।
परिजनों का आरोप है कि टक्कर लगने के बाद सतीश ट्रैक्टर के नीचे फंस गए थे। इसके बावजूद चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसकी रफ्तार बढ़ा दी। आरोप है कि सतीश को करीब 30 से 35 मीटर तक घसीटा गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
चीख-पुकार सुनकर ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली का पीछा किया। इसी दौरान चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। हादसे में चालक कलीम भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
पुलिस और ग्रामीणों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने सतीश कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल चालक कलीम को प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अवैध खनन को लेकर पहले से नाराजगी
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि महमूदपुर और आसपास के इलाकों में लंबे समय से अवैध मिट्टी खनन का काम चल रहा है। रात के समय मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तेज रफ्तार से गांव के रास्तों से गुजरती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार इन वाहनों की रफ्तार और आवाजाही को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
परिजनों के मुताबिक, सतीश कुमार भी तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को लेकर विरोध जताते थे। इसी वजह से पुरानी रंजिश होने का दावा किया जा रहा है। परिवार ने आरोप लगाया है कि इसी रंजिश के चलते सतीश को जानबूझकर निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की अभी पुलिस जांच कर रही है। किसी व्यक्ति या कथित खनन माफिया के खिलाफ हत्या का आरोप तभी कानूनी रूप से साबित माना जाएगा जब जांच और अदालत की प्रक्रिया में इसकी पुष्टि हो।
RSS से जुड़े थे सतीश कुमार
सतीश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, वह RSS के सपनावत खंड में सह-संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार और संगठन से जुड़े लोगों में भी शोक और आक्रोश की स्थिति बनी हुई है।
घटना के बाद गांव में तनाव की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
पुलिस ने शुरू की जांच
हापुड़ के अपर पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से सतीश कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। ट्रैक्टर चालक भी हादसे में घायल हुआ है और उसका इलाज कराया जा रहा है। पुलिस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर-ट्रॉली को अपने कब्जे में ले लिया है। मामले में घटनास्थल, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है।
हादसा या हत्या, जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सतीश कुमार की मौत वास्तव में तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुआ हादसा था या फिर परिजनों द्वारा लगाए जा रहे हत्या के आरोपों में कोई सच्चाई है। फिलहाल दोनों पक्षों से जुड़े दावों के बीच पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
परिजन इसे पुरानी रंजिश और अवैध खनन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि पुलिस ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले घटना को हत्या या सुनियोजित वारदात मानना उचित नहीं होगा।
हापुड़ की इस घटना ने एक बार फिर अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले भारी वाहनों की तेज रफ्तार और गांवों में उनकी आवाजाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस जांच के साथ यह भी देखना होगा कि इलाके में अवैध खनन को लेकर पहले कोई शिकायत या कार्रवाई हुई थी या नहीं।
फिलहाल महमूदपुर गांव में पुलिस की मौजूदगी बनी हुई है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सतीश कुमार की मौत के पीछे सिर्फ एक दर्दनाक सड़क हादसा था या फिर कोई आपराधिक साजिश।

