US Iran Conflict: अमेरिका के हमले के बाद ईरान का पलटवार, एरबिल में मिसाइल-ड्रोन अटैक

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद ईरान ने पलटवार का दावा किया है। ईरानी IRGC के मुताबिक, उत्तरी इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 1 सितंबर को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान में IRGC से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। CENTCOM के अनुसार, इन हमलों में एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य क्षमताओं, माइन बिछाने की क्षमता और संचार सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने इन कार्रवाई को क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे से जोड़कर बताया है।

इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की जानकारी सामने आई। IRGC ने दावा किया कि उसके मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना इराक के एरबिल में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाएं थीं। ईरानी पक्ष के अनुसार, हमले में एक मेंटेनेंस सेंटर और तकनीकी उपकरणों के भंडारण से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा एक अमेरिकी निगरानी गुब्बारे के गाइडेंस सिस्टम को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों में बताए गए नुकसान और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष में फिर बढ़ी सैन्य गतिविधि

पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का केंद्र केवल ईरान की जमीन तक सीमित नहीं रहा है। मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी ईरानी जवाबी कार्रवाई के संभावित निशाने बनते रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में इराक के अलावा क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। Reuters के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के जवाबी हमलों के बाद जॉर्डन, इराक और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों या परिसंपत्तियों को निशाना बनाने की कार्रवाई की।

एरबिल इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की सैन्य मौजूदगी रही है। ऐसे में वहां किसी भी मिसाइल या ड्रोन हमले से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट पर भी नजर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी लगातार चिंता बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल के संघर्ष में ईरान की ओर से समुद्री मार्ग और वाणिज्यिक जहाजों को लेकर चेतावनियों के बाद अमेरिका ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई को इस क्षेत्र में मौजूद खतरों से जोड़ा है।

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और शिपिंग पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से अमेरिका-ईरान संघर्ष की हर नई सैन्य कार्रवाई पर दुनिया के बाजारों की भी नजर रहती है।

आगे क्या हो सकता है?

ताजा घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ेगा। अमेरिका ने पहले ही संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में अपने सैनिकों और समुद्री व्यापारिक मार्गों के खिलाफ खतरों को गंभीरता से ले रहा है। वहीं ईरान लगातार अपनी जवाबी कार्रवाई को अपनी सुरक्षा और प्रतिरोध की नीति से जोड़ रहा है।

विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय यह है कि यदि हमले लगातार जारी रहते हैं तो संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है। इराक, जॉर्डन, बहरीन और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने इस तनाव से सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। एरबिल में हुए कथित मिसाइल-ड्रोन हमले के नुकसान और हताहतों को लेकर आने वाले समय में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है। इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की संवेदनशील स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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