Bihar Flood: बिहार में बाढ़ से हाहाकार, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; गंगा ने तोड़ा रिकॉर्ड
Bihar Flood: बिहार में बाढ़ से हाहाकार, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; गंगा ने तोड़ा रिकॉर्ड
बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। 12 जिलों के 70 प्रखंडों और 368 पंचायतों में करीब 22.42 लाख लोग प्रभावित हैं। पटना में गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया, जो पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर है। प्रशासन ने NDRF-SDRF की टीमें और राहत व्यवस्था बढ़ा दी है।
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बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर और कई नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण राज्य के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार के 12 जिलों में करीब 22.42 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ का असर 70 प्रखंडों और 368 पंचायतों तक पहुंच गया है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चिंता गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। पटना के गांधी घाट पर रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया। यह अगस्त 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से करीब 5 सेंटीमीटर ज्यादा है। गंगा के इस स्तर तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने निचले और नदी के आसपास के इलाकों में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।
गंगा के साथ-साथ बिहार की कई अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां अलग-अलग इलाकों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे निचले इलाकों में पानी बढ़ने और नए क्षेत्रों में बाढ़ फैलने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों को तटबंधों, संवेदनशील स्थानों और जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पटना और आसपास के इलाकों में बढ़ी चिंता
पटना में गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद नदी किनारे और निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर ने भी चिंता बढ़ाई है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ का असर रेलवे परिचालन पर भी पड़ा है। पटना-गया रेलखंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाले पुल के पास पानी का स्तर बढ़ने के बाद ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने कुछ ट्रेनों को रद्द और कुछ को डायवर्ट किया है। इससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई जिलों में राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई इलाकों में सामुदायिक रसोई के जरिए बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, राहत कार्यों के लिए बड़ी संख्या में सरकारी नावें लगाई गई हैं और NDRF तथा SDRF की टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं।
बिहार में राहत अभियान के तहत कई जगहों पर राहत शिविर और कम्युनिटी किचन भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, भोजन-पानी उपलब्ध कराना और बीमारियों के खतरे को कम करना है।
छपरा और भागलपुर में भी बिगड़े हालात
सारण जिले के छपरा क्षेत्र में भी बाढ़ का असर कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। वहीं भागलपुर के आसपास गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण निचले इलाकों में पानी फैलने की आशंका बनी हुई है। भागलपुर, मुंगेर और कटिहार जैसे जिलों में भी प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क, बिजली, आवागमन और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई परिवारों को सुरक्षित जगहों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी चिंता
बाढ़ के बीच आने वाले दिनों में बारिश की संभावना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश होने की स्थिति में नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है, जिससे पहले से प्रभावित इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी और तेज बहाव वाले पानी के करीब न जाएं और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। संवेदनशील क्षेत्रों में तटबंधों और जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग
बिहार की गंभीर बाढ़ स्थिति के बीच राजनीतिक स्तर पर भी केंद्र सरकार से मदद की मांग उठ रही है। तेजस्वी यादव ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
फिलहाल बिहार के कई हिस्सों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव यह तय करेगा कि बाढ़ की स्थिति और कितनी गंभीर होती है।
बिहार में 22 लाख से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने के बीच सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित परिवारों तक समय पर भोजन, पानी, चिकित्सा तथा अन्य जरूरी सहायता पहुंचाना है।

