Nepal Flash Flood: नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद राष्ट्रीय शोक, 1300+ मौतें; लापता मजदूरों के परिवारों का काठमांडू में प्रदर्शन
Nepal Flash Flood: नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद राष्ट्रीय शोक, 1300+ मौतें; लापता मजदूरों के परिवारों का काठमांडू में प्रदर्शन
पड़ोसी देश नेपाल से इस वक्त की बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई, हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। सोमवार, 7 सितंबर को नेपाल में इस त्रासदी के पीड़ितों की याद में राष्ट्रीय शोक मनाया गया। सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया और देशभर में शोक की स्थिति रही।
1300 से ज्यादा लोगों की मौत, हजारों अब भी लापता
नेपाल में आई इस भीषण फ्लैश फ्लड के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ी है। नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 7 सितंबर तक 1,355 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि करीब 4,996 लोग अब भी लापता बताए गए। बरामद शवों में अभी तक केवल 98 की पहचान हो सकी है। राहत और बचाव एजेंसियों ने अब तक 13,396 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या 1,300 से अधिक और लापता लोगों की संख्या करीब 5,000 या उससे ज्यादा बताई गई है। आपदा का असर नेपाल-चीन सीमा से लेकर कई पहाड़ी इलाकों तक देखने को मिला है।
राष्ट्रीय शोक के बीच जारी है राहत और तलाश
सोमवार को नेपाल में राष्ट्रीय शोक का दिन मनाया गया। यह त्रासदी के बाद 13वें दिन का शोक था। इस दौरान परिवारों ने अपने मृत परिजनों के लिए धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थनाएं कीं। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके परिजन अभी तक नहीं मिले हैं और उनके पास अंतिम संस्कार के लिए शव तक नहीं पहुंचा है। ऐसे परिवारों के लिए यह समय बेहद मुश्किल बना हुआ है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब भी प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रही हैं। पहाड़ी इलाकों में मलबा, कीचड़, टूटी सड़कें और खराब मौसम बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मी और विशेषज्ञ उन जगहों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं जहां लोगों के जिंदा फंसे होने की संभावना है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे मजदूरों की तलाश तेज
इस त्रासदी का एक बड़ा असर नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर पर भी पड़ा है। बाढ़ और मलबे के कारण कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारी लापता हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी अलग-अलग परियोजनाओं से लापता बताए गए हैं। कुछ मजदूर सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार कुछ सुरंगों में हवा की जगह और कमरे मौजूद हैं, जिससे वहां फंसे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद बनी हुई है।
इससे पहले भी राहत दलों को सुरंगों से लोगों को जिंदा निकालने में सफलता मिली है। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो नेपाली मजदूरों को करीब नौ दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया था। इस घटना ने अन्य सुरंगों में फंसे लोगों को लेकर उम्मीद भी जगाई है।
त्रिशूली-3B के लापता मजदूरों के परिवारों का प्रदर्शन
इसी बीच त्रिशूली-3B हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े लापता मजदूरों के परिवारों ने राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन किया। परिवारों की मांग है कि सरकार और बचाव एजेंसियां उनके परिजनों की तलाश में तेजी लाएं और उन्हें उनके बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए। नेपाल न्यूज की रिपोर्ट में भी 7 सितंबर को त्रिशूली-3B के लापता कर्मचारियों के परिवारों के प्रदर्शन का उल्लेख किया गया है।
परिवारों का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद उन्हें अपने लोगों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार से बचाव अभियान में ज्यादा संसाधन लगाने और प्रभावित परियोजना क्षेत्रों में खोज अभियान को प्राथमिकता देने की मांग की।
कई देशों की टीमें भी बचाव अभियान में जुटीं
नेपाल में जारी खोज एवं बचाव अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिल रहा है। अलग-अलग देशों की विशेषज्ञ टीमें, ड्रोन और तकनीकी उपकरणों की मदद से मुश्किल इलाकों में फंसे लोगों को खोजने की कोशिश कर रही हैं। अमेरिकी, भारतीय, चीनी और दक्षिण कोरियाई दलों सहित कई अंतरराष्ट्रीय सहायता टीमों ने अभियान में सहयोग किया है।
बचाव अभियान के दौरान कुछ लोगों को सुरंगों से सुरक्षित निकालना राहत की खबर रही है। हालांकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं, इसलिए तलाशी अभियान को रोकने के बजाय उन स्थानों पर लगातार काम किया जा रहा है जहां लोगों के फंसे होने की संभावना है।
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी पहुंचाया भारी नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा से सिर्फ जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, बल्कि नेपाल के सड़क, पुल और ऊर्जा ढांचे पर भी बड़ा असर पड़ा है। कई हाइड्रोपावर प्लांट प्रभावित हुए हैं और महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा है। इससे राहत सामग्री पहुंचाने और दूरदराज के इलाकों तक बचाव दलों को भेजने में भी मुश्किलें आई हैं।
नेपाल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन और हाइड्रोपावर की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस आपदा का असर आने वाले समय में भी देखने को मिल सकता है। बाढ़ से हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की चुनौती भी सरकार के सामने है।
परिजनों को अब भी अपनों के लौटने की उम्मीद
नेपाल की इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू उन परिवारों की स्थिति है जिनके परिजन अभी तक लापता हैं। कई परिवार राहत शिविरों, अस्पतालों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि तलाशी अभियान के दौरान उनके अपने सुरक्षित मिल सकते हैं।
त्रिशूली-3B सहित अलग-अलग हाइड्रोपावर परियोजनाओं के कर्मचारियों के परिजन सरकार से लगातार जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपने परिजनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी चाहिए।
फिलहाल नेपाल में राहत, बचाव और तलाश का अभियान जारी है। राष्ट्रीय शोक के बीच पूरा देश इस विनाशकारी आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दे रहा है। वहीं हजारों लापता लोगों के परिवारों की नजर अब बचाव दलों की अगली कार्रवाई और किसी अच्छी खबर पर टिकी हुई है।

