Jharkhand Khadi Board Protest: 4 महीने से वेतन नहीं, आउटसोर्स कर्मियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू; उठाई कई बड़ी मांगें

Jharkhand Khadi Board Protest: 4 महीने से वेतन नहीं, आउटसोर्स कर्मियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू; उठाई कई बड़ी मांगें

रांची: झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। मंगलवार, 8 सितंबर 2026 से रांची के रातू रोड स्थित उद्योग भवन परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जिस खादी और ग्रामोद्योग व्यवस्था का उद्देश्य आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और रोजगार को बढ़ावा देना है, उसी व्यवस्था से जुड़े कर्मियों को लंबे समय से अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

आंदोलनरत कर्मचारियों के मुताबिक उनकी सबसे बड़ी समस्या लंबित वेतन और मानदेय को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब साढ़े तीन से चार महीने से भुगतान नहीं हुआ है। लंबे समय तक वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों ने बकाया भुगतान को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है।

चार महीने से वेतन का इंतजार

कर्मचारियों का कहना है कि लगातार काम करने के बावजूद समय पर वेतन नहीं मिलना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है। कई कर्मचारी परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी आय पर निर्भर हैं। ऐसे में कई महीनों का वेतन अटकने से आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

इसी वजह से कर्मचारियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लंबित भुगतान और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

CEO का पद भरने की मांग

आउटसोर्स कर्मचारियों ने बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) के रिक्त पद को जल्द भरने की मांग भी की है। कर्मचारियों का कहना है कि बोर्ड के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से कामकाज और वित्तीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, CEO का पद करीब साढ़े तीन महीने से रिक्त बताया गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति होने से वेतन और मानदेय से जुड़े मामलों के समाधान की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।

2017 के स्वीकृत पद और 2019 के मानदेय प्रस्ताव पर कार्रवाई की मांग

कर्मचारियों ने वर्ष 2017 में स्वीकृत पदों को लागू करने और 2019 में मानदेय बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित मामलों को अब और टाला नहीं जाना चाहिए।

उनका कहना है कि यदि पहले से स्वीकृत पदों और मानदेय से जुड़े प्रस्तावों पर समय पर निर्णय लिया जाता, तो कर्मचारियों की स्थिति में सुधार हो सकता था।

सेवा नियमावली और सामाजिक सुरक्षा की मांग

आंदोलनरत कर्मचारियों ने सेवा नियमावली लागू करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि लंबे समय से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्पष्ट सेवा शर्तें और सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए।

इसके साथ ही कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की सुरक्षा की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार काम करने के बावजूद आउटसोर्स व्यवस्था के कारण उन्हें नौकरी की स्थिरता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।

आउटसोर्स व्यवस्था खत्म कर स्थायी समायोजन की मांग

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्स व्यवस्था को समाप्त कर स्थायी समायोजन करना भी शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभागीय कार्य करने वाले कर्मियों को स्थायी व्यवस्था में शामिल करने पर सरकार और बोर्ड को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उनका आरोप है कि ठेका या आउटसोर्स व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को पर्याप्त सेवा सुरक्षा नहीं मिल पाती। इसलिए वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें उनके रोजगार और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

समान काम के लिए समान वेतन

धरने पर बैठे कर्मचारियों ने समान काम के लिए समान वेतन की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारी समान प्रकृति का काम कर रहे हैं तो उनके साथ वेतन और सेवा सुविधाओं के मामले में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उपलब्ध रिपोर्ट में भी आंदोलनरत कर्मियों की प्रमुख मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा, ठेका प्रथा से जुड़े शोषण को खत्म करना और बकाया वेतन का भुगतान शामिल बताया गया है।

रांची के अलावा दूसरे क्षेत्रों से भी कर्मचारी जुड़े

यह आंदोलन केवल रांची तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जमशेदपुर और झारखंड के अन्य क्षेत्रों से भी कर्मचारी धरने में शामिल होने पहुंचे हैं। वहीं, लखनऊ से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने ऑनलाइन माध्यम से आंदोलन का समर्थन किया है। इससे संकेत मिलता है कि कर्मचारियों की समस्याएं व्यापक स्तर पर उठाई जा रही हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं से संबंधित अधिकारियों को भी अवगत कराया है, लेकिन अपेक्षित स्तर पर समाधान नहीं हुआ। अब कर्मचारी आंदोलन के जरिए अपनी मांगों को मजबूती से सामने रखना चाहते हैं।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

आंदोलनरत कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और लंबित भुगतान की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा

अब इस पूरे मामले में नजर इस बात पर है कि सरकार और खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। यदि जल्द बातचीत और समाधान की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है तो आंदोलन आगे और लंबा खिंच सकता है।

खादी एवं ग्रामोद्योग का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। ऐसे में इससे जुड़े कर्मचारियों की वेतन, सेवा सुरक्षा और रोजगार स्थायित्व की मांगों का समाधान इस व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

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