Stock Market Crash: सेंसेक्स 1,100 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी 22,800 के नीचे
Stock Market Crash: सेंसेक्स 1,100 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी 22,800 के नीचे
US-Iran तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता, सात हफ्तों की गिरावट के सिलसिले के बीच बाजार पर चौतरफा दबाव
भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ की। शुरुआती कारोबार में ही Sensex और Nifty लाल निशान में चले गए और बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। सुबह करीब 9:43 बजे सेंसेक्स 901.59 अंक यानी 1.22 प्रतिशत गिरकर 72,994.16 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि Nifty 50 करीब 282.85 अंक यानी 1.22 प्रतिशत टूटकर 22,857.65 पर पहुंच गया था।
इसके बाद गिरावट और गहरी हुई। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा नीचे गया और अंत में करीब 1,124 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी भी 22,800 के स्तर से नीचे बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट व्यापक रही और कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव शामिल रहे। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.3 प्रतिशत बढ़कर 106.7 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा बातचीत में गतिरोध से तेल आपूर्ति को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी आशंकाओं ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया।
भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही कंपनियों की लागत और मार्जिन को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ती है।
US-Iran तनाव का बाजार पर असर
वैश्विक बाजारों में इस समय अमेरिका और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर है। बातचीत में गतिरोध और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ाई।
इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाला। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी रही। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹3,693.93 करोड़ की इक्विटी बेची थी।
कौन से शेयर सबसे ज्यादा टूटे?
सोमवार के शुरुआती कारोबार में Nifty 50 के कई प्रमुख शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। Hindalco Industries, Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank, Grasim Industries और Shriram Finance शुरुआती कारोबार में प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे और इनमें करीब 1.76 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।
बाद के कारोबार में भी बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर दबाव बना रहा। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में थे। Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank, HDFC Bank, Bajaj Finserv, Hindustan Unilever, Mahindra & Mahindra, Larsen & Toubro और Bharat Electronics प्रमुख कमजोर शेयरों में रहे।
Realty और Financial सेक्टर पर भी दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो Nifty Realty Index में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट शुरुआती कारोबार में देखी गई। इसके अलावा Cement, Financial Services, Private Bank, Auto और FMCG इंडेक्स भी करीब 1 प्रतिशत तक कमजोर रहे।
हालांकि, बाजार में सभी सेक्टर एक समान दबाव में नहीं रहे। शुरुआती कारोबार में Nifty Pharma अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बना रहा।
बाजार में क्यों बढ़ी घबराहट?
शेयर बाजार पर एक साथ कई कारकों का असर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कमजोर एशियाई बाजार और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने सेंटीमेंट को प्रभावित किया।
इसके अलावा भारतीय बाजार पहले से ही लगातार कई हफ्तों की कमजोरी से गुजर रहा था। 28 सितंबर की गिरावट ने इस कमजोर सिलसिले को और बढ़ा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार सातवें सप्ताह की गिरावट के बाद सोमवार को और दबाव में आ गए।
निवेशकों के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर रहेगी। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए आयात लागत और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका असर कंपनियों की लागत और बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सोमवार को शुरुआती कारोबार में विदेशी फंडों की बिकवाली को भी बाजार की कमजोरी की वजहों में गिना गया।
फिलहाल शेयर बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी में दिन के दौरान आई तेज गिरावट बताती है कि वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय इक्विटी बाजार पर कितना तेजी से पड़ सकता है।
हालांकि, बाजार की आगे की दिशा को लेकर किसी एक दिन की गिरावट से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बाजारों के संकेत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अहम कारक रहेंगे।

