Jairam Mahato Case: जयराम महतो पर केस को लेकर गरमाई सियासत, शैलेंद्र महतो ने दी झारखंड बंद की चेतावनी

Jairam Mahato Case: जयराम महतो पर केस को लेकर गरमाई सियासत, शैलेंद्र महतो ने दी झारखंड बंद की चेतावनी

झारखंड की राजनीति में डुमरी विधायक जयराम महतो से जुड़े मामले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बरवाअड्डा थाना प्रकरण में जयराम महतो के खिलाफ दर्ज केस और पुलिस एसोसिएशन के रुख के बीच अब पूर्व सांसद और झारखंड आंदोलनकारी शैलेंद्र महतो खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जरूरत पड़ने पर झारखंड बंद जैसे कदम की चेतावनी दी है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद धनबाद के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, जयराम महतो और अन्य लोगों के खिलाफ थाना परिसर में कथित तौर पर दुर्व्यवहार, सरकारी काम में बाधा और अन्य आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार की शिकायत भी सामने आई है।

मामले की शुरुआत के बाद जयराम महतो और पुलिस के बीच विवाद लगातार बढ़ता गया। इस दौरान एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें पुलिस के अनुसार विधायक और थाना प्रभारी के बीच बातचीत हुई थी। पुलिस एसोसिएशन ने इस कथित व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई और माफी की मांग की थी।

हालांकि, जयराम महतो ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर अलग पक्ष रखा है। उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को गंभीरता से जांचा जाना चाहिए और वह कानून से ऊपर नहीं हैं। वायरल ऑडियो को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।

पुलिस एसोसिएशन भी हुआ सक्रिय

विवाद बढ़ने के बाद झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने जयराम महतो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन की ओर से राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी। इससे मामला केवल विधायक और एक थाना प्रभारी के बीच विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस और विधायिका के बीच अधिकार और सम्मान को लेकर बहस का रूप लेने लगा।

पुलिस पक्ष का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा पुलिस अधिकारी के साथ कथित अभद्र व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं जयराम महतो के समर्थकों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

शैलेंद्र महतो ने उठाए सवाल

अब इस पूरे विवाद में पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो की एंट्री ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक विधायक की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और विधायिका के अधिकारों से जुड़ी है।

शैलेंद्र महतो ने बरवाअड्डा थाना परिसर में लगे CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से भी मामले में हस्तक्षेप कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस एसोसिएशन के आंदोलन के कारण राज्य का सामान्य कामकाज प्रभावित होता है, तो जनता की ओर से इसका विरोध हो सकता है और जरूरत पड़ने पर झारखंड बंद का आह्वान किया जा सकता है।

जयराम महतो की अग्रिम जमानत पर भी नजर

इस बीच मामले का कानूनी पक्ष भी महत्वपूर्ण हो गया है। जयराम महतो समेत अन्य आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया है। 1 सितंबर को धनबाद की विशेष MP-MLA अदालत में मामले पर सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने पुलिस से केस डायरी पेश करने को कहा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित है।

अदालत में आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

क्यों बढ़ रहा है राजनीतिक दबाव?

जयराम महतो झारखंड के स्थानीय मुद्दों, युवाओं, रोजगार और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े सवालों पर लगातार मुखर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज केस का राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है।

शैलेंद्र महतो ने राज्य के दूसरे विधायकों से भी दलीय राजनीति से ऊपर उठकर इस मामले पर आवाज उठाने की अपील की है। उनका तर्क है कि यदि आज किसी एक जनप्रतिनिधि के अधिकारों को लेकर सवाल उठता है और बाकी लोग चुप रहते हैं, तो भविष्य में ऐसी स्थिति दूसरे विधायकों के सामने भी आ सकती है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल Jairam Mahato Case में तीन मोर्चों पर नजर बनी हुई है। पहला, अदालत में 10 सितंबर को होने वाली अग्रिम जमानत की सुनवाई। दूसरा, पुलिस एसोसिएशन की आगे की रणनीति। और तीसरा, शैलेंद्र महतो की ओर से दी गई झारखंड बंद की चेतावनी पर आगे क्या कदम उठाया जाता है।

अगर दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ता है तो यह मामला झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं अगर सरकार और संबंधित पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालते हैं, तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है।

फिलहाल इतना साफ है कि बरवाअड्डा थाना प्रकरण ने जयराम महतो और पुलिस के बीच विवाद को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। अब आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई, पुलिस एसोसिएशन का रुख और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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