Jharkhand SIR विवाद: JMM का CEC पर हमला, इस्तीफे की मांग से बढ़ा सियासी घमासान
Jharkhand SIR विवाद: JMM का CEC पर हमला, इस्तीफे की मांग से बढ़ा सियासी घमासान
Jharkhand SIR विवाद: JMM का CEC पर हमला, इस्तीफे की मांग से बढ़ा सियासी घमासान
झारखंड में Special Intensive Revision को लेकर सियासत तेज, JMM ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की; कांग्रेस ने भी राज्यभर में किया प्रदर्शन
झारखंड में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। पार्टी ने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग भी की है। वहीं, कांग्रेस ने भी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर झारखंड के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन किया है।
JMM ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
JMM के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सवाल उठाए। उनके मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। मीडिया रिपोर्टों में ऐसी आपत्तियों की संख्या कम से कम 14 बताई गई है।
विनोद कुमार पांडेय ने सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्य किसी फैसले या प्रक्रिया पर लिखित आपत्ति दर्ज कर रहे थे, तो उन आपत्तियों पर किस तरह विचार किया गया और अंतिम निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए गए। JMM ने इसे चुनाव आयोग की पारदर्शिता और संस्थागत कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है।
JMM की ओर से यह भी कहा गया है कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है। पार्टी का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के कारण गरीब और वंचित तबके के लोगों को दस्तावेज जुटाने और सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है। ये JMM की ओर से लगाए गए आरोप और राजनीतिक दावे हैं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े पक्ष की ओर से कहा गया है कि SIR समेत अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, किसी चुनाव आयुक्त की ओर से किसी मुद्दे पर अलग राय, सुझाव या टिप्पणी देना बहु-सदस्यीय संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हो सकता है। इसलिए किसी व्यक्तिगत आपत्ति को आयोग के अंतिम फैसले के समान नहीं माना जाना चाहिए।
यही अंतर अब राजनीतिक विवाद का मुख्य हिस्सा बन गया है। एक तरफ विपक्षी दल चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया और SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग की ओर से अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है।
‘Vote Chori’ को लेकर भी विपक्ष के आरोप
SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से ‘Vote Chori’ यानी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, यह विपक्षी दलों का आरोप है और इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
झारखंड कांग्रेस ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने 28 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने और रांची में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया था। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
झारखंड में आज प्रदर्शन
28 सितंबर को झारखंड कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रांची में CEO कार्यालय का घेराव किया और राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। रांची में प्रदर्शन पुराना विधानसभा परिसर के आसपास से शुरू होकर धुर्वा स्थित CEO कार्यालय तक पहुंचा।
JMM ने भी 28 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध कार्यक्रम का ऐलान किया था। पार्टी की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और उन्हें पद से हटाने की मांग की गई।
इसके अलावा, झारखंड में वाम दलों ने भी SIR की प्रक्रिया को रोकने और CEC को हटाने की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
SIR पर क्यों बढ़ रहा है विवाद?
Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसमें आवश्यक सुधार करना है। लेकिन इसकी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जरूरत, नामों के सत्यापन और मतदाता सूची में संभावित बदलावों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
JMM और कांग्रेस का कहना है कि प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे पात्र मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो और किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत की जा रही हैं और अंतिम फैसलों को लेकर आयोग ने सर्वसम्मति की बात कही है।
आगे क्या होगा?
झारखंड में SIR अब सिर्फ मतदाता सूची की प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। JMM और कांग्रेस लगातार CEC के खिलाफ कार्रवाई और SIR से जुड़े सवालों पर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यह होगी कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और चुनाव आयोग विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर क्या विस्तृत जवाब देता है। साथ ही, SIR से जुड़े मामलों में अदालतों के सामने आने वाले मुद्दे भी आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
फिलहाल झारखंड में JMM, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच SIR को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। वहीं चुनाव आयोग की ओर से अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने का पक्ष सामने रखा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस दोनों के और तेज होने की संभावना है।

