JPSC Exam Scam: स्ट्रांग रूम से बाहर निकाली गईं कॉपियां, एक्सपर्ट ने लिखे जवाब; CID जांच में बड़ा खुलासा
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। CID की जांच में अब उत्तरपुस्तिकाओं को स्ट्रांग रूम से बाहर निकालकर लिखवाने और परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर किए जाने की बात सामने आई है।
जांच से जुड़े हालिया खुलासे के मुताबिक, आरोपितों से पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा में फायदा पहुंचाने के लिए उनकी उत्तरपुस्तिकाएं स्ट्रांग रूम से बाहर निकाली गईं। इसके बाद कथित तौर पर बाहर से बुलाए गए विषय विशेषज्ञों की मदद से उत्तर लिखवाए गए और फिर कॉपियों को वापस स्ट्रांग रूम में रख दिया गया। इन आरोपों की CID जांच और सत्यापन कर रही है।
करीब 100 अभ्यर्थियों को पास कराने की साजिश?
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, JPSC की ACF और FRO नियुक्ति परीक्षा में अधिकारियों, बिचौलियों और एजेंटों के कथित नेटवर्क ने करीब 100 अभ्यर्थियों को पास कराने की साजिश रची थी। रिपोर्ट में लगभग 1.20 करोड़ रुपये की वसूली की बात कही गई है।
जांच में यह भी दावा सामने आया है कि प्रारंभिक परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए कुछ अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए और मुख्य परीक्षा में उत्तरपुस्तिकाओं के साथ कथित तौर पर अलग स्तर पर हेरफेर किया गया।
30 कॉपियां स्ट्रांग रूम से बाहर निकालने का दावा
CID पूछताछ से सामने आई जानकारी के मुताबिक करीब 30 अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं स्ट्रांग रूम से बाहर निकालकर लिखवाई गईं। इसके लिए कथित तौर पर बाहर के प्रोफेसरों या विषय विशेषज्ञों की मदद ली गई।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि उत्तरपुस्तिकाओं को बाहर लिखवाने के बाद उन्हें दोबारा स्ट्रांग रूम में पहुंचाया गया। अगर जांच में यह दावा सही साबित होता है तो यह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।
40 कॉपियों में सॉफ्टवेयर से हेरफेर?
मामला केवल उत्तरपुस्तिकाओं को बाहर निकालने तक सीमित होने का आरोप नहीं है। जांच में करीब 40 उत्तरपुस्तिकाओं के डेटा में सॉफ्टवेयर के जरिए हेरफेर किए जाने की बात भी सामने आई है।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अलग-अलग स्तरों पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कथित तौर पर इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई। CID अब परीक्षा एजेंसी, संबंधित कर्मचारियों, बिचौलियों और अन्य संदिग्ध लोगों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
OMR और सॉफ्टवेयर में भी छेड़छाड़ के आरोप
इससे पहले CID जांच में OMR और OSM सिस्टम में कथित छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आ चुके हैं। जांच सामग्री के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों द्वारा छोड़े गए सवालों में बाद में सही जवाब भरे जाने और कुछ उत्तरों में बदलाव किए जाने की बात सामने आई थी।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि परीक्षा में सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए OMR शीट और डिजिटल सिस्टम दोनों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अभ्यर्थियों के लिए क्यों गंभीर है मामला?
JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में हजारों अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में अगर किसी अभ्यर्थी को पैसे या किसी नेटवर्क के जरिए अनुचित फायदा पहुंचाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका सीधा असर पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर उत्तरपुस्तिकाएं वास्तव में स्ट्रांग रूम से बाहर निकाली गईं, तो सुरक्षा व्यवस्था में यह सेंध कैसे लगी? स्ट्रांग रूम की निगरानी, रिकॉर्ड और उत्तरपुस्तिकाओं की आवाजाही से जुड़े दस्तावेज अब जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
जांच में आगे क्या?
CID इस पूरे मामले में पूछताछ, दस्तावेजों और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ रही है। इससे पहले भी इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई है।
फिलहाल JPSC Exam Scam की जांच जारी है। जैसे-जैसे आरोपितों के बयान और दूसरे साक्ष्य सामने आएंगे, कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जिस स्ट्रांग रूम में परीक्षा की कॉपियां सबसे सुरक्षित मानी जाती हैं, आखिर वहीं से कॉपियां बाहर कैसे पहुंचीं?
CID की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।

