मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट की सलाह, नामांकन रद्द होने पर चुनाव आयोग जाएं
मध्य प्रदेश से जुड़े राज्यसभा चुनाव विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस की उम्मीदवार Meenakshi Natarajan द्वारा नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब किसी उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज किया जाता है, तो आमतौर पर इस तरह के मामलों का समाधान चुनाव आयोग के समक्ष उपलब्ध होता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम Court ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसा कोई उदाहरण मौजूद है, जिसमें नामांकन रद्द होने के इसी चरण में अदालत ने सीधे हस्तक्षेप किया हो। अदालत की इस टिप्पणी को मामले की सुनवाई में अहम माना जा रहा है।
नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi ने दलील दी कि जिस आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया जा रहा है, उसमें केवल समन जारी हुए थे। उनके अनुसार ऐसी स्थिति में उस मामले का खुलासा करना अनिवार्य नहीं था, इसलिए नामांकन रद्द करने का निर्णय उचित नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर रिटर्निंग ऑफिसर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उम्मीदवार ने फॉर्म-26 में एक लंबित शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। अधिकारियों के अनुसार यह जानकारी हलफनामे का महत्वपूर्ण हिस्सा थी और इसके अभाव में दस्तावेज अधूरा माना गया। इसी आधार पर नामांकन पत्र को निरस्त कर दिया गया।
अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में अदालत और चुनाव आयोग के स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर राजनीतिक दलों और पर्यवेक्षकों की नजर बनी रहेगी।

