Meerut Snake Case: मेरठ के सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा

Meerut Snake Case: मेरठ के सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आए चर्चित ‘सांप कांड’ में अदालत ने 16 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने अमित कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए शव के पास जिंदा सांप रखा गया था। अदालत ने अपराध की गंभीरता और उसे छिपाने की कोशिश को ध्यान में रखते हुए इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी का मामला माना।

क्या है मेरठ का चर्चित सांप कांड?

यह मामला मेरठ जिले के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। अमित कश्यप की अप्रैल 2025 में अपने घर में मौत हो गई थी। शुरुआत में परिवार को संदेह हुआ कि उसकी मौत सांप के काटने से हुई है, क्योंकि उसके शव के पास एक जिंदा सांप मिला था।

पहली नजर में मामला सर्पदंश का लग रहा था, लेकिन जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे संकेत मिले, जिनसे मौत की वजह पर सवाल उठने लगे। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि अमित की मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी।

पोस्टमार्टम के निष्कर्षों ने जांच की दिशा बदल दी। पुलिस ने मामले को हत्या के तौर पर जांचना शुरू किया और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को जुटाया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज

जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साक्ष्य बनी। रिपोर्ट और चिकित्सकीय गवाही के अनुसार, अमित के चेहरे तथा गर्दन के आसपास चोट के निशान थे और उसकी मौत दम घुटने से हुई थी। इससे सांप के काटने की शुरुआती आशंका को समर्थन नहीं मिला।

पुलिस के मुताबिक, अमित की हत्या के बाद उसकी मौत को सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई थी। शव के नीचे या पास जिंदा सांप रखने का उद्देश्य जांच को भटकाना और घटना को प्राकृतिक मौत जैसा दिखाना बताया गया।

ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस मामले में भी जांच एजेंसियों ने इन्हीं कड़ियों को जोड़कर अदालत के सामने अभियोजन पक्ष का मामला रखा।

रविता और अमरदीप पर क्या आरोप लगे?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, रविता और अमरदीप के बीच संबंध थे और अमित को इस बारे में जानकारी हो गई थी। आरोप था कि इसी वजह से दोनों ने अमित को रास्ते से हटाने की साजिश रची। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान दोनों के बीच संबंधों और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल की।

रिपोर्टों के अनुसार, अमरदीप ने एक सपेरे से एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। जांच में यह भी सामने आया कि सांप को धार्मिक आयोजन के लिए खरीदने की बात कही गई थी। इस कड़ी को भी अभियोजन पक्ष ने अपनी जांच और दलीलों में शामिल किया।

हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में आरोपों और अदालत में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है। इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों की गवाही पर विचार करने के बाद दोनों को हत्या तथा आपराधिक साजिश के लिए दोषी ठहराया।

13 महीने में पूरा हुआ मुकदमा

अमित कश्यप की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें अभियोजन पक्ष ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुकदमे में 12 गवाहों की गवाही हुई। अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को दोषी ठहराया था। सजा की मात्रा पर सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

इस तरह हत्या की घटना से लेकर सजा सुनाए जाने तक की न्यायिक प्रक्रिया लगभग 13 महीने में पूरी हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों दोषियों को सजा सुनाए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में सामने आई है।

अदालत ने क्यों माना ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ मामला?

भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड सबसे कठोर सजा है। इसे हर हत्या के मामले में नहीं दिया जाता। अदालत को अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों, साक्ष्यों और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार करना होता है। ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ सिद्धांत के तहत मृत्युदंड देने के लिए विशेष कारण दर्ज करना आवश्यक होता है।

मेरठ के इस मामले में अदालत ने हत्या के तरीके और उसे सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए कथित तौर पर रची गई साजिश को गंभीर माना। अभियोजन पक्ष ने भी अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर कठोरतम सजा की मांग की थी।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी कानून में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के प्रावधान होते हैं। इसलिए सजा सुनाए जाने और उसके अंतिम रूप से लागू होने के बीच कानूनी अंतर होता है।

अमित के परिवार को मिला इंसाफ का भरोसा

अमित की मौत के बाद उसके परिवार को पहले सांप के काटने की आशंका थी, लेकिन पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद मामला हत्या के रूप में सामने आया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान परिवार को न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार रहा।

अदालत के फैसले के बाद परिवार की ओर से राहत व्यक्त किए जाने की खबरें सामने आई हैं। किसी प्रियजन की हत्या के मामले में न्यायिक फैसला परिवार के लिए महत्वपूर्ण होता है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया के सभी चरण पूरे होना भी जरूरी है।

मेरठ का सांप कांड क्यों बना चर्चा का विषय?

इस मामले ने इसलिए व्यापक चर्चा बटोरी क्योंकि अभियोजन पक्ष के अनुसार हत्या को छिपाने के लिए सांप के काटने से मौत होने का भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना सामने आने के बाद जांच ने नया मोड़ लिया और अदालत में साक्ष्यों के आधार पर मामला आगे बढ़ा।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि संदिग्ध मौत होने पर केवल शुरुआती अनुमान के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। वैज्ञानिक जांच, पोस्टमार्टम, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मेरठ की अदालत ने रविता और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाकर इस मामले में अपना फैसला सुना दिया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान सजा से जुड़े सभी वैधानिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

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