लोकसभा में 360 के आंकड़े के करीब NDA, क्या अब DMK थामेगी साथ?
लोकसभा में 360 के आंकड़े के करीब NDA, क्या अब DMK थामेगी साथ?
Focus Keyword: NDA 360 Majority
NDA 360 Majority को लेकर देश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 293 सीटें थीं, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने गठबंधन की ताकत को और बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के अलग होने के बाद एनडीए की प्रभावी संख्या बढ़कर लगभग 319 तक पहुंचने की चर्चा है। इसी बीच तमिलनाडु की राजनीति में आए नए मोड़ ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकती है।
हाल के दिनों में डीएमके नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) को एक बड़ा झटका तब लगा जब उसकी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी गठबंधन की एकजुटता में आई दरारें भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर नए गठबंधन समीकरणों को जन्म दे सकती हैं।
तमिलनाडु में अभिनेता-विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के उभरते प्रभाव और विपक्षी खेमे में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच डीएमके पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सहित कई दलों के टीवीके सरकार या उसके राजनीतिक एजेंडे के प्रति नरम रुख की खबरों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या डीएमके आने वाले समय में अपनी राजनीतिक रणनीति बदल सकती है।
हालांकि, अब तक डीएमके की ओर से एनडीए में शामिल होने या भाजपा के साथ किसी तरह की राजनीतिक साझेदारी का कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। पार्टी नेतृत्व लगातार अपने मौजूदा राजनीतिक रुख पर कायम दिखाई देता है। फिर भी राजनीतिक विश्लेषक इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे कि बदलते हालात में दल अपने हितों के अनुसार नए फैसले ले सकते हैं।
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 सीटों का माना जाता है। यदि एनडीए की संख्या वास्तव में 319 के आसपास पहुंच चुकी है और भविष्य में डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन भी मिल जाता है, तो गठबंधन की ताकत लगभग 341 सीटों तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत के काफी करीब होगा। हालांकि यह पूरी तरह काल्पनिक राजनीतिक गणना है क्योंकि डीएमके के समर्थन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है।
राजनीतिक रूप से दो-तिहाई बहुमत का महत्व काफी बड़ा माना जाता है। ऐसे बहुमत के साथ केंद्र सरकार को कई महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन और बड़े विधायी फैसले लेने में अपेक्षाकृत आसानी होती है। महिला आरक्षण के पूर्ण क्रियान्वयन, परिसीमन (Delimitation) जैसे विषयों और अन्य बड़े संवैधानिक बदलावों पर सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। यही कारण है कि संसद में सीटों के गणित को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है।
विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के सामने भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। यदि विपक्षी दलों में टूट-फूट जारी रहती है और कुछ क्षेत्रीय दल अपनी राजनीतिक दिशा बदलते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति का संतुलन बदल सकता है। दूसरी ओर, क्षेत्रीय दल आमतौर पर अपने राज्य के हितों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए किसी भी संभावित गठबंधन परिवर्तन का फैसला केवल राष्ट्रीय राजनीति के आधार पर नहीं होता।
तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि डीएमके और भाजपा की वैचारिक दूरी काफी बड़ी है। ऐसे में दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है। फिर भी भारतीय राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती रही हैं और कई बार ऐसे राजनीतिक समीकरण बने हैं जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि डीएमके के एनडीए में शामिल होने की चर्चा केवल राजनीतिक अटकलों तक सीमित है। न तो डीएमके और न ही भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। आने वाले महीनों में तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति में होने वाले घटनाक्रम यह तय करेंगे कि ये चर्चाएं केवल अटकलें साबित होती हैं या किसी नए राजनीतिक समीकरण की भूमिका तैयार कर रही हैं।

