राहुल गांधी प्रधानमंत्री बने तो Gen-Z नेता को शिक्षा मंत्री बनाने की कोशिश करेंगे: रेवंत रेड्डी
हैदराबाद। देश में पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के आंदोलन को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि देश का अगला केंद्रीय शिक्षा मंत्री Gen-Z यानी नई पीढ़ी का कोई युवा नेता बने। उनका मानना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब नई पीढ़ी को नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी मिले।
हैदराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा कि हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि यदि युवा संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं, तो सरकारों को भी बड़े फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले छात्र आंदोलन में देशभर से आए हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया और उनके संघर्ष ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि Gen-Z केवल सोशल मीडिया तक सीमित पीढ़ी नहीं है, बल्कि यह वह पीढ़ी है जो देश की शिक्षा, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रही है। उन्होंने कहा कि आज के युवा बदलाव चाहते हैं और उन्हें केवल वोटर नहीं, बल्कि नीति निर्धारक के रूप में भी अवसर मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह INDIA गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से इस विषय पर चर्चा करेंगे कि देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी ऐसे युवा नेता को सौंपी जाए, जो नई पीढ़ी की सोच, चुनौतियों और आकांक्षाओं को बेहतर ढंग से समझता हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथ में होना चाहिए जो छात्रों की समस्याओं को महसूस कर सके और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता रखता हो।
रेवंत रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों ने यह साबित कर दिया है कि युवाओं की आवाज को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, रोजगार में देरी और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों ने युवाओं में गहरी चिंता पैदा की है। ऐसे में सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे केवल आश्वासन न दें, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाएं।
उन्होंने चुनाव सुधारों पर भी जोर दिया और कहा कि देश में लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष की जानी चाहिए। उनके अनुसार आज के समय में 21 वर्ष का युवा भी देश, समाज और राजनीति को समझने में सक्षम है तथा उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि तेलंगाना सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से देशभर में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस शुरू होगी।
अपने भाषण में रेवंत रेड्डी ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलन को केवल विरोध प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे लोकतंत्र की शक्ति और युवाओं की जागरूकता के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संगठित आंदोलन हमेशा बदलाव का माध्यम रहे हैं और देश के युवाओं ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वे अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सजग हैं।
मुख्यमंत्री ने छात्रों और युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी संसद, विधानसभाओं और नीति निर्माण संस्थाओं तक पहुंचेगी, तभी शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकल सकेगा। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी देने का समय आ चुका है।
इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, छात्र संगठनों के सदस्य तथा बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे। रेवंत रेड्डी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में युवा नेतृत्व, शिक्षा सुधार और चुनावी आयु सीमा जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह की राजनीतिक बहस आगे बढ़ती है।

