Yashasvi Jaiswal Harsha Bhogle Controversy: आकाश चोपड़ा ने बताया दोनों पक्ष सही
जायसवाल-हर्षा भोगले विवाद पर आकाश चोपड़ा की राय, बोले- दोनों नजरिए सही हो सकते हैं
Yashasvi Jaiswal Harsha Bhogle Controversy पर आकाश चोपड़ा ने अपनी राय रखी। उन्होंने हर्षा भोगले के नजरिए का समर्थन करते हुए जायसवाल की प्रतिक्रिया को भी समझने योग्य बताया।
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट के पहले दिन मैदान पर यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच हुई घटना ने क्रिकेट जगत में बहस छेड़ दी है। इस विवाद को लेकर अलग-अलग पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर अपनी राय रख रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने भी पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
आकाश चोपड़ा ने इस विवाद को सिर्फ सही और गलत के नजरिए से देखने के बजाय दोनों पक्षों को समझने की कोशिश की है। उन्होंने कमेंटेटर हर्षा भोगले के उस नजरिए का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यशस्वी जायसवाल को विवाद के दौरान वहां से चुपचाप हट जाना चाहिए था। हालांकि, चोपड़ा ने यह भी माना कि लगातार उकसावे के बाद जायसवाल की प्रतिक्रिया को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता।
जायसवाल और फर्नांडो के बीच क्या हुआ?
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट के पहले दिन यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच मैदान पर बहस देखने को मिली।
दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर तक बातचीत और विवाद की स्थिति बनी रही। मामला बढ़ने के बाद इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई।
घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC ने दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की। दोनों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और एक-एक डिमेरिट अंक भी दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद मामला सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल भावना और खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर भी बहस शुरू हो गई।
हर्षा भोगले ने क्या कहा था?
इस घटना पर कमेंट्री के दौरान हर्षा भोगले ने अपनी राय रखते हुए कहा था कि यशस्वी जायसवाल को ऐसी स्थिति में विवाद से दूर होकर वहां से हट जाना चाहिए था।
हर्षा भोगले क्रिकेट में खिलाड़ियों के व्यवहार और पुराने क्रिकेटिंग सिद्धांतों को काफी महत्व देते हैं। उनके नजरिए के मुताबिक, मैदान पर विरोधी खिलाड़ी द्वारा उकसाए जाने के बावजूद खिलाड़ी को अपना संयम बनाए रखना चाहिए और विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
आकाश चोपड़ा ने हर्षा भोगले की इस सोच को पूरी तरह खारिज नहीं किया।
आकाश चोपड़ा ने किया हर्षा भोगले का समर्थन
आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस पूरे मामले पर बात की। उन्होंने कहा कि हर्षा भोगले जिस नजरिए की बात करते हैं, वह क्रिकेट की पुरानी सोच और परंपरा से जुड़ा हुआ है।
चोपड़ा के मुताबिक, पुराने दौर में क्रिकेटरों को मैदान पर उकसावे के बावजूद खुद को नियंत्रित करने और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती थी।
इस नजरिए से देखें तो जायसवाल को भी स्थिति से दूर होकर खेल पर ध्यान देना चाहिए था।
लेकिन आकाश चोपड़ा ने यहां एक महत्वपूर्ण बात भी कही।
लगातार उकसावे का भी रखना होगा ध्यान
आकाश चोपड़ा का कहना है कि सिर्फ जायसवाल की प्रतिक्रिया को देखकर पूरे मामले का फैसला करना उचित नहीं होगा।
उनके मुताबिक, मौजूदा टेस्ट सीरीज में जायसवाल को कई बार विरोधी खिलाड़ियों की छींटाकशी और विवादित सेंड-ऑफ का सामना करना पड़ा है।
अगर किसी खिलाड़ी को लगातार उकसाया जाता है और कई मौकों पर बात मर्यादा की सीमा तक पहुंच जाती है, तो उसके बाद आने वाली प्रतिक्रिया को भी उसी संदर्भ में देखना चाहिए।
यही वजह है कि चोपड़ा ने जायसवाल की प्रतिक्रिया को पूरी तरह गलत मानने से इनकार किया।
नई पीढ़ी का अलग नजरिया
आकाश चोपड़ा ने इस विवाद को पुरानी और नई पीढ़ी के क्रिकेटिंग नजरिए से भी जोड़कर देखा।
उनके मुताबिक, पुरानी पीढ़ी के क्रिकेटरों की सोच यह रही है कि अगर विरोधी खिलाड़ी कुछ कहता है तो उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ जाना चाहिए।
लेकिन मौजूदा दौर के कई युवा खिलाड़ी तुरंत जवाब देने में विश्वास रखते हैं।
यशस्वी जायसवाल भी मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और आत्मविश्वास के लिए जाने जाते हैं। वह चुनौतियों से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने वाले खिलाड़ी के रूप में नजर आते हैं।
क्या जायसवाल को जवाब देना चाहिए था?
यही सवाल इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है।
एक नजरिए से देखा जाए तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों से संयम की उम्मीद की जाती है। मैदान पर तनावपूर्ण स्थिति बनने के बावजूद खिलाड़ी अगर विवाद से दूर हो जाए तो मामला आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
हर्षा भोगले का नजरिया इसी सोच पर आधारित है।
दूसरी तरफ, आकाश चोपड़ा यह भी याद दिलाते हैं कि खिलाड़ी किस परिस्थिति में प्रतिक्रिया दे रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है।
अगर किसी खिलाड़ी को लगातार उकसाया जा रहा हो तो उसके व्यवहार को केवल एक घटना के आधार पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।
दोनों नजरिए में है कुछ सच्चाई
आकाश चोपड़ा की सबसे खास बात यही रही कि उन्होंने इस मामले को किसी एक पक्ष के समर्थन में खत्म नहीं किया।
उन्होंने माना कि हर्षा भोगले का नजरिया भी सही हो सकता है और जायसवाल की प्रतिक्रिया को समझने वाला नजरिया भी अपनी जगह सही हो सकता है।
पुराने क्रिकेटिंग सिद्धांतों के मुताबिक मैदान पर विवाद से बचना बेहतर है।
वहीं, नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का मानना हो सकता है कि अगर उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है तो उन्हें जवाब देने का अधिकार है।
यही दो अलग-अलग सोच इस पूरे विवाद को चर्चा का विषय बना रही हैं।
ICC की कार्रवाई के बाद बढ़ी चर्चा
ICC की कार्रवाई ने भी इस मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
दोनों खिलाड़ियों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना और एक-एक डिमेरिट अंक लगाया गया। इससे यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैदान पर खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर नियम काफी सख्त हैं।
खिलाड़ियों से उम्मीद की जाती है कि वे प्रतिस्पर्धा के बीच भी खेल भावना और अनुशासन बनाए रखें।
खेल भावना पर फिर बहस
क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच हल्की-फुल्की छींटाकशी लंबे समय से खेल का हिस्सा रही है। लेकिन जब यह व्यक्तिगत विवाद या आक्रामक टकराव में बदल जाती है, तब मामला गंभीर हो जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि खिलाड़ियों को उकसावे की स्थिति में किस तरह प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
क्या उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर देना चाहिए या जरूरत पड़ने पर जवाब देना भी खेल का हिस्सा माना जा सकता है?
इसका जवाब शायद हर व्यक्ति अपने नजरिए से देगा।
आकाश चोपड़ा की बात ने बहस को दिया नया एंगल
आकाश चोपड़ा ने इस विवाद में एक संतुलित नजरिया सामने रखा है। उन्होंने न तो पूरी तरह जायसवाल को गलत ठहराया और न ही मैदान पर उनके व्यवहार को सही बताया।
उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि स्थिति को उसके पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।
यही वजह है कि जायसवाल-हर्षा भोगले विवाद अब सिर्फ एक कमेंट या एक मैदान की घटना नहीं रह गया है। यह क्रिकेट में पुरानी और नई पीढ़ी की सोच, खेल भावना और खिलाड़ियों के व्यवहार पर एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।
आखिरकार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता जरूरी है, लेकिन उसके साथ संयम और अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

