H-1B वीजा फ्रॉड पर अमेरिका का बड़ा एक्शन: 17 प्रवासियों की नागरिकता रद्द करने की तैयारी, भारतीय मूल के CEO भी निशाने पर
वॉशिंगटन डी.सी. | 10 जून 2026
अमेरिका ने आव्रजन और वीजा धोखाधड़ी के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करते हुए 17 प्राकृतिक रूप से नागरिक बने लोगों (Naturalized Citizens) की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) का कहना है कि इन लोगों ने नागरिकता प्राप्त करने के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया या गलत जानकारी दी थी।
इस कार्रवाई ने खास तौर पर भारतीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि इस सूची में भारतीय मूल के एक कारोबारी और टेक उद्योग से जुड़े CEO का नाम भी शामिल है। उन पर H-1B वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग और फर्जी रोजगार संबंधी दस्तावेज जमा करने के आरोप लगाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, जिन 17 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, उन पर विभिन्न प्रकार के गंभीर आरोप हैं। इनमें वीजा धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी, मादक पदार्थों से जुड़े अपराध, यौन अपराध और नागरिकता आवेदन के दौरान झूठी जानकारी देने जैसे मामले शामिल हैं। DOJ का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी देकर नागरिकता प्राप्त की है, तो कानून के तहत उसकी नागरिकता रद्द की जा सकती है।
भारतीय मूल के CEO पर क्या आरोप हैं?
DOJ की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, भारतीय मूल के व्यवसायी Neeraj Sharma पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी के माध्यम से कई H-1B वीजा आवेदन दाखिल किए, जिनमें कथित तौर पर ऐसी नौकरियों का उल्लेख किया गया जो वास्तव में मौजूद नहीं थीं। आरोप है कि आवेदन के साथ प्रस्तुत कुछ दस्तावेजों में गलत जानकारी और कथित रूप से जाली हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया। बाद में नागरिकता के लिए आवेदन करते समय उन्होंने इन गतिविधियों का खुलासा नहीं किया।
क्या है H-1B वीजा?
H-1B अमेरिका का एक लोकप्रिय वर्क वीजा कार्यक्रम है, जिसके तहत विदेशी पेशेवरों को विशेष कौशल वाली नौकरियों में काम करने की अनुमति मिलती है। हर साल हजारों भारतीय इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ और तकनीकी पेशेवर इसी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं। यदि कोई कंपनी फर्जी नौकरी दिखाकर या गलत दस्तावेज देकर H-1B वीजा हासिल करने की कोशिश करती है, तो इसे गंभीर धोखाधड़ी माना जाता है।
नागरिकता रद्द होने का क्या मतलब है?
डीनैचुरलाइजेशन (Denaturalization) वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी प्राकृतिक रूप से नागरिक बने व्यक्ति की नागरिकता वापस ली जा सकती है। यह प्रक्रिया अदालत के माध्यम से होती है और अंतिम फैसला न्यायाधीश द्वारा दिया जाता है। यदि सरकार अपने आरोप साबित कर देती है, तो संबंधित व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता खो सकता है और भविष्य में निर्वासन (Deportation) जैसी कार्रवाई का भी सामना कर सकता है।
ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख
रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने आव्रजन धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। DOJ का कहना है कि अमेरिकी नागरिकता एक विशेष अधिकार है और इसे धोखाधड़ी या झूठी जानकारी के आधार पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
फिलहाल स्थिति क्या है?
- अमेरिकी न्याय विभाग ने 17 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की है।
- इनमें भारतीय मूल के कारोबारी नीरज शर्मा भी शामिल हैं।
- आरोप H-1B वीजा धोखाधड़ी और नागरिकता आवेदन में गलत जानकारी देने से जुड़े हैं।
- अंतिम फैसला अमेरिकी अदालतें करेंगी; अभी आरोप साबित होना बाकी है।
- यह अमेरिका के हालिया वर्षों के सबसे बड़े डीनैचुरलाइजेशन अभियानों में से एक माना जा रहा है।

