Jharkhand Coal Project Families: झारखंड में कोयला परियोजनाओं से 6,584 परिवार प्रभावित, नौकरी नहीं मिलने पर बढ़ा आक्रोश

Jharkhand Coal Project Families: झारखंड में कोयला परियोजनाओं से 6,584 परिवार प्रभावित हुए, लेकिन बीसीसीएल द्वारा नौकरी नहीं दिए जाने के आरोप के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

पिछले पांच वर्षों में कोयला परियोजनाओं के कारण हजारों परिवारों की जमीन और घर प्रभावित हुए, लेकिन बीसीसीएल द्वारा एक भी प्रभावित व्यक्ति को नौकरी नहीं दिए जाने के आरोप के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

धनबाद। झारखंड से एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान विभिन्न कोयला परियोजनाओं की वजह से 6,584 परिवार प्रभावित हुए हैं। किसी परिवार की कृषि भूमि अधिग्रहित हुई, तो किसी को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह बसना पड़ा। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन लोगों ने अपनी जमीन और आशियाना खोया, उन्हें बदले में रोजगार क्यों नहीं मिला?

जानकारी के अनुसार, प्रभावित परिवारों का आरोप है कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने इन हजारों परिवारों में से एक भी व्यक्ति को नौकरी नहीं दी। यह दावा सामने आने के बाद कोयलांचल क्षेत्र में लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

जमीन गई, लेकिन रोजगार नहीं मिला

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयला परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था। कई परिवारों ने उम्मीद की थी कि जमीन के बदले उनके घर के किसी सदस्य को स्थायी नौकरी मिलेगी, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं मिला।

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि परियोजनाओं के कारण उनकी खेती बंद हो गई, पशुपालन प्रभावित हुआ और पारंपरिक आय के स्रोत समाप्त हो गए। ऐसे में नौकरी की उम्मीद ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा थी।

विस्थापन की समस्या बनी बड़ी चुनौती

कोयला परियोजनाओं के विस्तार के कारण कई इलाकों में लोगों को अपने घरों से हटना पड़ा। विस्थापित परिवारों का आरोप है कि पुनर्वास और रोजगार दोनों मामलों में अपेक्षित मदद नहीं मिली। कुछ परिवार किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कई लोग अस्थायी रोजगार करके जीवनयापन कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल आर्थिक मुआवजा पर्याप्त नहीं होता। यदि किसी परिवार की जमीन और घर दोनों प्रभावित होते हैं, तो दीर्घकालिक पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होती है।

बीसीसीएल पर उठ रहे सवाल

बीसीसीएल पर आरोप लग रहे हैं कि उसने प्रभावित परिवारों के रोजगार संबंधी दावों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। हालांकि कंपनी की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह मुद्दा अब स्थानीय संगठनों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनता जा रहा है।

लोगों का कहना है कि यदि अधिग्रहण के समय नौकरी का वादा किया गया था, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। कितने लोगों को पात्र माना गया, कितने आवेदन प्राप्त हुए और कितने मामलों पर निर्णय हुआ—इन सभी सवालों के जवाब की मांग की जा रही है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

प्रभावित परिवारों ने राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को बीसीसीएल से जवाब मांगना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विस्थापित परिवारों को उनका अधिकार मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड जैसे खनन प्रधान राज्य में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे हैं। यदि प्रभावित लोगों को समय पर रोजगार और पुनर्वास नहीं मिलता, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है।

अब सबकी नजर सरकार और बीसीसीएल पर

फिलहाल यह मामला कोयलांचल क्षेत्र में तेजी से तूल पकड़ रहा है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दी, लेकिन बदले में उन्हें न तो स्थायी रोजगार मिला और न ही भविष्य की सुरक्षा।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि झारखंड सरकार और बीसीसीएल इस मुद्दे पर क्या जवाब देते हैं और क्या प्रभावित परिवारों को रोजगार, पुनर्वास और अन्य अधिकारों को लेकर कोई ठोस राहत मिलती है या नहीं।

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