पेपर लीक पर संसद में घमासान, चर्चा को तैयार सरकार; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर CJP का आंदोलन तेज
नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान यह मामला एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि वह इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने पेपर लीक मामले पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और लोकसभा व राज्यसभा को पहले दोपहर 12 बजे तथा बाद में 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का कहना था कि केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि सरकार इस विषय से पीछे नहीं हट रही है और वह सदन में चर्चा कराने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और इस विषय पर सभी पक्षों की राय सुनी जा सकती है।
उधर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि 20 जुलाई का प्रदर्शन केवल शुरुआत थी। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार ने समय रहते निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली पहुंचेंगे और आंदोलन का दायरा और बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक महीने से छात्र शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं।
रांका ने कहा कि आंदोलन महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों से प्रेरित है और इसे पूरी तरह अहिंसक रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है, तब भी वे पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वर्तमान या भविष्य में कोई मामला दर्ज नहीं किया जाए।
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो के कई प्रमुख स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को अस्थायी रूप से प्रभावित किया गया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले यातायात और मेट्रो सेवाओं की जानकारी लेने की अपील की।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि तत्काल सुनवाई का पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले की नियमित कानूनी प्रक्रिया पर कोई रोक है।
संसद के बाहर और भीतर दोनों जगह राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी बीच पटना में भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबर सामने आई। अधिकारियों के अनुसार इस घटना में एक पुलिस अधिकारी घायल हुए। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।
फिलहाल सरकार और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में संसद में होने वाली चर्चा, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार की अगली रणनीति पर सभी की नजर रहेगी। पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

