चीनी सेना ने भारत को कहा ‘थैंक्यू’, रिश्तों में सुधार के दिए संकेत
चीनी सेना ने भारत को कहा थैंक्यू
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश सामने आया है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की 99वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत में तैनात चीन के डिफेंस अताशे रियर एडमिरल यू जियान ने सार्वजनिक रूप से भारतीय सेना का धन्यवाद किया। उन्होंने पिछले वर्ष केरल तट के पास आग और विस्फोट का शिकार हुए एक कार्गो जहाज से 12 चीनी क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचाने के लिए भारतीय पक्ष की सराहना की। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और संबंधों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित पीएलए की 99वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रियर एडमिरल यू जियान ने कहा कि भारत और चीन केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की दो बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं भी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश वर्तमान समय में विकास के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहे हैं और ऐसे में सहयोग, संवाद तथा आपसी विश्वास को मजबूत करना दोनों के हित में है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, हाल के महीनों में विभिन्न स्तरों पर संवाद बढ़ा है और दोनों पक्ष मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सकारात्मक माहौल भविष्य में भी जारी रहेगा।
रियर एडमिरल यू जियान ने विशेष रूप से उस घटना का उल्लेख किया, जब पिछले वर्ष जून में केरल तट के पास एक कार्गो जहाज में आग और विस्फोट की घटना हुई थी। इस दुर्घटना के दौरान जहाज पर मौजूद 12 चीनी नाविकों को सुरक्षित निकालने में भारतीय एजेंसियों और बचाव दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि चीन इस मानवीय सहायता को कभी नहीं भूलेगा और भारतीय पक्ष के इस सहयोग के लिए वह दिल से आभार व्यक्त करता है।
उन्होंने कहा कि समुद्र में संकट के समय मानव जीवन की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है और भारत द्वारा दिखाई गई तत्परता दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी दोनों देश सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
अपने संबोधन में यू जियान ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देते रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं ने कई अंतरराष्ट्रीय मिशनों में वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे दोनों देशों के साझा दायित्व और वैश्विक जिम्मेदारी का उदाहरण बताया।
चीनी डिफेंस अताशे ने कहा कि भारत और चीन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद अवश्य हैं, लेकिन साझा हित इन मतभेदों से कहीं अधिक बड़े और महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास, क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक शांति और आपसी सहयोग जैसे कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। उनका मानना है कि निरंतर संवाद और विश्वास निर्माण से संबंधों को और मजबूत बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि चीन भारत के साथ राजनयिक और सैन्य स्तर पर संवाद बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीमा से जुड़े मुद्दों सहित अन्य विषयों पर बातचीत जारी रखने, सैन्य स्तर पर संपर्क बढ़ाने और विश्वास बहाली के उपायों को आगे बढ़ाने पर उन्होंने जोर दिया। उनके अनुसार, बेहतर संबंध केवल दोनों सरकारों के लिए ही नहीं बल्कि दोनों देशों की जनता के हित में भी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत तेज हुई है। सीमा से जुड़े मुद्दों पर सैन्य और राजनयिक वार्ताओं के अलावा दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में चीनी डिफेंस अताशे द्वारा भारतीय सेना की सार्वजनिक सराहना को एक सकारात्मक कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद जैसे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं, लेकिन दोनों देशों ने बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की प्रतिबद्धता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग के जरिए ही द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और संतुलित बनाया जा सकता है।
फिलहाल रियर एडमिरल यू जियान का यह बयान भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक माहौल का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

