Sawan Shiv Bhajan: 35 साल बाद भी सावन में गूंजता है ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’
Sawan Shiv Bhajan: 35 साल बाद भी सावन में गूंजता है ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’
सावन का महीना शुरू होते ही देशभर में बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ कांवड़ यात्रा का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। हजारों-लाखों श्रद्धालु गंगा जल लेकर भगवान शिव के मंदिरों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। इस धार्मिक माहौल में भक्ति संगीत की खास भूमिका होती है, और कुछ गीत ऐसे हैं जो समय बीतने के बावजूद अपनी लोकप्रियता नहीं खोते।
ऐसा ही एक सदाबहार शिव भजन है ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’, जो फिल्म रणभूमि (1991) में शामिल था। यह गीत पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से कांवड़ियों और शिव भक्तों की पहली पसंद बना हुआ है। आज भी सावन के दौरान कांवड़ मार्गों, शिविरों और डीजे पर यह भजन खूब सुनाई देता है।
फिल्म रणभूमि से मिली खास पहचान
यह गीत 1991 में रिलीज हुई फिल्म रणभूमि का हिस्सा था। फिल्म में यह गीत अभिनेता ऋषि कपूर पर फिल्माया गया था। उस दौर में फिल्मी शिव भजनों की लोकप्रियता काफी अधिक थी, लेकिन ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’ ने एक अलग पहचान बनाई।
गीत की धुन में भक्ति के साथ उत्साह और लोकधुनों जैसा रंग भी देखने को मिलता है, जो कांवड़ यात्रा के माहौल से पूरी तरह मेल खाता है। यही वजह है कि यह केवल फिल्मी गीत नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे शिव भक्तों के बीच एक लोकप्रिय सावन भजन बन गया।
अमित कुमार की आवाज ने बनाया खास
इस गीत को मशहूर गायक अमित कुमार ने अपनी आवाज दी थी। अमित कुमार, दिग्गज पार्श्व गायक किशोर कुमार के बेटे हैं और अपनी अलग गायकी शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी आवाज में भक्ति और मस्ती का जो मिश्रण सुनाई देता है, उसने इस गीत को और भी खास बना दिया।
गीत का महिला संस्करण प्रसिद्ध गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने गाया था, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई।
असद भोपाली के बोलों का जादू
इस भजन के बोल मशहूर शायर और गीतकार असद भोपाली ने लिखे थे। उनके शब्दों में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, आनंद और भक्तिभाव की झलक मिलती है। सरल और याद रह जाने वाले बोलों ने इस गीत को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
भक्ति संगीत में अक्सर वही गीत लंबे समय तक लोकप्रिय रहते हैं जिन्हें लोग आसानी से गुनगुना सकें, और यह भजन उसी श्रेणी में आता है।
कांवड़ यात्रा की पहचान बन चुका है गीत
हर साल सावन में हरिद्वार, देवघर, काशी, उज्जैन और देश के अन्य प्रमुख शिवधामों की ओर निकलने वाले कांवड़ियों के बीच यह गीत खूब बजता है। कई स्थानों पर कांवड़ शिविरों में सुबह से रात तक शिव भजनों की धुन सुनाई देती है, जिनमें ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’ आज भी प्रमुख रूप से शामिल रहता है।
भक्तों का कहना है कि इस गीत में भक्ति के साथ यात्रा की ऊर्जा भी महसूस होती है। लंबी पैदल यात्रा के दौरान ऐसे उत्साहपूर्ण भजन श्रद्धालुओं को थकान भूलाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
नई पीढ़ी में भी कायम है लोकप्रियता
दिलचस्प बात यह है कि यह गीत केवल पुराने श्रोताओं तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स के दौर में नई पीढ़ी के शिव भक्त भी इसे उतना ही पसंद कर रहे हैं। कई डीजे और भक्ति म्यूजिक चैनल सावन स्पेशल प्लेलिस्ट में इस गीत को शामिल करते हैं।
यूट्यूब पर इसके विभिन्न संस्करण और रीमिक्स भी खूब सुने जाते हैं, लेकिन मूल गीत की लोकप्रियता आज भी बरकरार है।
सावन और भक्ति संगीत का अटूट रिश्ता
सावन का महीना भारतीय संस्कृति में केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत और लोक परंपराओं का उत्सव भी माना जाता है। शिव भजनों की धुनें कांवड़ यात्रा को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान देती हैं।
‘पीकर शंकर जी की बूटी…’ जैसे गीत इस बात का उदाहरण हैं कि फिल्मी संगीत भी समय के साथ लोक आस्था का हिस्सा बन सकता है।

