सरायकेला-खरसावां में 22 लाख के तीन इनामी नक्सली गिरफ्तार, AK-47 बरामद
सरायकेला-खरसावां जिले में झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त सुरक्षा बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर विशेष अभियान चलाकर कुल 22 लाख रुपये के इनामी तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए नक्सलियों में 15 लाख रुपये का इनामी मदन महतो, 5 लाख रुपये का इनामी रवि सरदार और 2 लाख रुपये की इनामी मीणा शामिल हैं। पुलिस के अनुसार मीणा, रवि सरदार की पत्नी है और लंबे समय से नक्सली संगठन की सक्रिय सदस्य रही है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित नक्सली संगठन के कुछ सक्रिय सदस्य सरायकेला-खरसावां और आसपास के जंगल क्षेत्रों में मौजूद हैं और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलने के बाद जिला पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों तक चले अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी और घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों ने एक AK-47 राइफल, एक पिस्टल और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है। पुलिस का मानना है कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल नक्सली गतिविधियों में किया जाता था। इसके अलावा बरामद दस्तावेजों और सामग्रियों से संगठन की गतिविधियों, संपर्क सूत्रों और संभावित योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान को कई दिनों की खुफिया निगरानी और समन्वित रणनीति का परिणाम बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार मदन महतो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित था और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। रवि सरदार पर 5 लाख रुपये का इनाम था, जबकि मीणा पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों से फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि वे किन क्षेत्रों में सक्रिय थे, उनके संपर्क किन-किन नक्सली संगठनों से जुड़े हुए थे और हथियारों की आपूर्ति किस माध्यम से की जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों और सहयोगियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बल लगातार नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। सरायकेला-खरसावां, पश्चिम सिंहभूम और आसपास के जंगल क्षेत्रों को कभी नक्सली गतिविधियों का मजबूत आधार माना जाता था। हालांकि लगातार चल रहे अभियानों, खुफिया निगरानी और स्थानीय स्तर पर बढ़ते सहयोग के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नक्सली संगठन के लिए उसके अनुभवी और इनामी सदस्यों की गिरफ्तारी बड़ा झटका होती है। इससे संगठन की नेतृत्व क्षमता, हथियारों की आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय नेटवर्क प्रभावित होता है। खास तौर पर AK-47 जैसे स्वचालित हथियार की बरामदगी यह संकेत देती है कि सुरक्षा बलों ने केवल गिरफ्तारी ही नहीं की, बल्कि संगठन की सशस्त्र क्षमता को भी कमजोर करने में सफलता हासिल की है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति और विकास को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा अभियान आगे भी जारी रहेंगे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें और नक्सली संगठनों के प्रभाव से दूर रहें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकार आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के माध्यम से भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लाने के प्रयास कर रही है।
इस कार्रवाई के बाद कोल्हान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्क कर दी गई है। जंगल क्षेत्रों में अतिरिक्त गश्त बढ़ाई गई है ताकि किसी संभावित प्रतिक्रिया या नक्सली गतिविधि को रोका जा सके। पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
फिलहाल यह गिरफ्तारी झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कुल 22 लाख रुपये के इनामी तीन नक्सलियों की गिरफ्तारी और आधुनिक हथियारों की बरामदगी से सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। आने वाले दिनों में पूछताछ और आगे की जांच से इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

