Sudivya Kumar Sonu Death: झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, 7 सितंबर को सरकारी कार्यालय बंद; राज्य में दो दिन का राजकीय शोक
Sudivya Kumar Sonu Death: झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, 7 सितंबर को सरकारी कार्यालय बंद; राज्य में दो दिन का राजकीय शोक
झारखंड से इस वक्त की बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। राज्य के वरिष्ठ मंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता और गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 56 वर्ष की उम्र में अचानक निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झामुमो के कई वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।
अचानक बिगड़ी तबीयत, 56 साल की उम्र में निधन
रिपोर्टों के मुताबिक सुदिव्य कुमार सोनू की तबीयत रविवार की सुबह अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। उनके अचानक निधन ने परिवार, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को गहरे सदमे में डाल दिया।
सुदिव्य कुमार सोनू झारखंड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे और झामुमो के महत्वपूर्ण नेताओं में उनकी गिनती होती थी। वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगियों में भी माने जाते थे। उनके निधन के बाद पार्टी के भीतर और राज्य की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है।
झारखंड में दो दिन का राजकीय शोक
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झारखंड सरकार ने 6 और 7 सितंबर को दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान राज्य सरकार के निर्धारित कार्यक्रमों को भी रद्द किया गया है। सरकारी आदेश के मुताबिक 7 सितंबर को झारखंड के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। राज्य के उन सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जहां नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।
इस फैसले के बाद 7 सितंबर को राज्य के सरकारी कामकाज पर भी असर पड़ा है। सुदिव्य कुमार के निधन को राज्य सरकार और झामुमो के लिए बड़ी राजनीतिक क्षति के तौर पर देखा जा रहा है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ गिरिडीह में किया गया। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, पार्टी के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें अपने बड़े भाई के समान बताया और कहा कि उनके जाने से पैदा हुआ खालीपन बेहद कठिन है। अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं की भावुक तस्वीरें भी सामने आईं।
झामुमो के पुराने और भरोसेमंद नेताओं में थे सुदिव्य कुमार
सुदिव्य कुमार सोनू लंबे समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार वह करीब तीन दशकों से पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने गिरिडीह की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
उन्होंने पहली बार 2009 में गिरिडीह विधानसभा सीट से झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2014 में भी उन्होंने चुनाव लड़ा, जबकि 2019 में उन्होंने गिरिडीह सदर सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।
सरकार में रहते हुए उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ शहरी विकास, आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही। उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों और छात्रों की समस्याओं को लेकर भी वह सक्रिय रहे।
झारखंड की राजनीति में बड़ा नुकसान
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन को झारखंड की राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह न केवल गिरिडीह के लोकप्रिय राजनीतिक चेहरों में शामिल थे, बल्कि झामुमो संगठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में शामिल होने के कारण सरकार और पार्टी के स्तर पर भी उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी।
उनके निधन के बाद झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच गहरा शोक है। गिरिडीह से लेकर राजधानी रांची तक पार्टी कार्यालयों और नेताओं के बीच श्रद्धांजलि का दौर जारी है। बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
राज्य में शोक का माहौल
सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक निधन ने झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार ने दो दिन का राजकीय शोक घोषित कर उन्हें सम्मान दिया है, जबकि 7 सितंबर को सभी सरकारी कार्यालयों के बंद रहने का निर्णय लिया गया है।
एक सक्रिय जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ झामुमो नेता के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके अचानक चले जाने से पार्टी और राज्य की राजनीति में उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। फिलहाल पूरा झारखंड उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और उनके परिवार, समर्थकों तथा झामुमो कार्यकर्ताओं के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

