Gaza Documentary ‘Naja’: इजरायल में बढ़ा विवाद, नेतन्याहू ने लगाए नफरत फैलाने के आरोप
Gaza Documentary ‘Naja’: इजरायल में बढ़ा विवाद, नेतन्याहू ने लगाए नफरत फैलाने के आरोप
गाजा संघर्ष पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘NAZA’ को लेकर इजरायल में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। वेनिस फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी पुरस्कार जीतने वाली इस डॉक्यूमेंट्री पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी आपत्ति जताई है। नेतन्याहू ने फिल्म को इजरायल और यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली कोशिश बताया है। वहीं, इजरायल के संस्कृति मंत्री मिकी जोहर ने फिल्म की जांच कराने और इसके निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
‘NAZA’ का निर्देशन इजरायली पत्रकार और फिल्म निर्माता युवल अब्राहम तथा राहेल जोर ने किया है। दोनों इससे पहले ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री ‘No Other Land’ से भी जुड़े रहे हैं। फिल्म में गाजा युद्ध के दौरान इजरायली सेना की कार्रवाई और टारगेट चयन से जुड़े दावों को सामने लाया गया है। डॉक्यूमेंट्री में इजरायली सेना और खुफिया तंत्र से जुड़े 24 लोगों के इंटरव्यू शामिल हैं, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बातचीत की।
वेनिस फिल्म फेस्टिवल में मिला सम्मान
‘NAZA’ को 83वें वेनिस फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी पुरस्कार दिया गया। फिल्म के प्रदर्शन के बाद दर्शकों ने करीब 25 मिनट तक तालियां बजाईं, जिसे फेस्टिवल की चर्चित प्रतिक्रियाओं में गिना गया। डॉक्यूमेंट्री में गाजा में सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिकों की मौत, टारगेट चुनने की प्रक्रिया और कथित तकनीकी प्रणालियों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
फिल्म का नाम ‘NAZA’ इजरायली सैन्य शब्दावली से जुड़े एक संक्षिप्त रूप से लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका इस्तेमाल किसी सैन्य हमले में संभावित रूप से मारे जाने वाले नागरिकों की संख्या के संदर्भ में किया जाता है। डॉक्यूमेंट्री में कुछ पूर्व सैन्य और खुफिया कर्मियों ने दावा किया है कि गाजा में हमलों के दौरान नागरिकों की संभावित मौतों को सैन्य निर्णयों का हिस्सा माना गया। हालांकि, इन दावों को इजरायली सेना ने खारिज किया है।
नेतन्याहू ने फिल्म को बताया नफरत फैलाने वाली कोशिश
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘चौंकाने वाली उकसावे की कोशिश’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म इजरायल डिफेंस फोर्सेज यानी IDF को गलत तरीके से पेश करती है और इससे दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा मिल सकता है।
इजरायली सैन्य नेतृत्व ने भी फिल्म में लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई है। सेना का कहना है कि डॉक्यूमेंट्री में शामिल गुमनाम गवाहों की पहचान और उनकी सैन्य भूमिकाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती। IDF ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि गाजा में उसके अभियान का उद्देश्य सैन्य संगठनों को निशाना बनाना है और नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए प्रयास किए जाते हैं।
संस्कृति मंत्री ने नागरिकता रद्द करने की बात कही
इजरायल के संस्कृति मंत्री मिकी जोहर ने भी फिल्म और उसके निर्माताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को झूठा और देश के खिलाफ बताया। जोहर ने आरोप लगाया कि फिल्म के निर्माता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल को बदनाम कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिकी जोहर ने युवल अब्राहम और राहेल जोर की इजरायली नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले की जांच करने को कहा है कि फिल्म के लिए सामग्री कैसे जुटाई गई और क्या इसमें ऐसे कृत्य हुए हैं जिन्हें युद्धकाल में दुश्मन की मदद के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, नागरिकता रद्द करने की धमकी को लेकर इजरायल में भी बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि किसी डॉक्यूमेंट्री में सरकार या सेना की आलोचना करना अपने आप में देशद्रोह नहीं माना जा सकता। वहीं, सरकार समर्थक पक्ष का आरोप है कि युद्ध के दौरान ऐसी फिल्म देश की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।
निर्माताओं ने कहा—सच्चाई सामने लाना जरूरी
डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक युवल अब्राहम ने फिल्म का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल के नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने देश की सैन्य कार्रवाइयों पर सवाल उठाएं। वेनिस में पुरस्कार स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि इजरायल में लोगों को यह फिल्म देखनी चाहिए, क्योंकि इसमें उनके देश की कार्रवाइयों से जुड़े गंभीर आरोपों पर चर्चा की गई है।
फिल्म निर्माताओं का कहना है कि डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य इजरायल या यहूदी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं, बल्कि गाजा में सैन्य निर्णयों और नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच करना है। उनका दावा है कि फिल्म में शामिल गवाहों के बयान लंबे समय तक चली पत्रकारिता और जांच के बाद रिकॉर्ड किए गए हैं। दूसरी ओर, इजरायली सेना और सरकार इन दावों को तथ्यहीन और पक्षपातपूर्ण बता रही है।
विवाद अब सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक पहुंचा
‘NAZA’ को लेकर विवाद अब केवल फिल्म के दावों तक सीमित नहीं रह गया है। मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, युद्धकालीन पत्रकारिता और सरकार की आलोचना के अधिकार तक पहुंच गया है। एक पक्ष इसे सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्र जांच और गवाही के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे इजरायल की छवि खराब करने वाला राजनीतिक अभियान बता रहा है।
फिलहाल, डॉक्यूमेंट्री में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और इजरायली सरकार की संभावित कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। यह स्पष्ट है कि वेनिस में सम्मान मिलने के बाद ‘NAZA’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है और इजरायल के भीतर इसने राजनीतिक, सामाजिक तथा कानूनी बहस को और तेज कर दिया है।

