Rajasthan Civic Elections: निकाय चुनाव के बाद बोर्ड बनाने की जंग तेज, बीजेपी-कांग्रेस की निर्दलीय पार्षदों पर नजर
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब नगर निकायों में बोर्ड गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक जोर आजमाइश तेज हो गई है। कई नगर परिषदों और नगर निगमों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने के लिए लगातार संपर्क साध रहे हैं।
निकाय चुनाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस नगर निकाय में किस पार्टी का बोर्ड बनेगा। जिन निकायों में बहुमत का आंकड़ा किसी भी दल के पास नहीं है, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन सत्ता की चाबी बन गया है। कई जगहों पर पार्षदों के पाला बदलने और समर्थन देने के दावों के कारण राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
खैरथल में कांग्रेस-बीजेपी के बीच बढ़ी खींचतान
खैरथल नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। यहां कांग्रेस ने 20 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि बीजेपी को 8 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 17 सीटें मिली हैं। परिषद में बहुमत के लिए 23 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत से तीन सीट दूर है।
इसी बीच कांग्रेस नेता विक्रम सिंह उर्फ विक्की चौधरी ने 11 पार्षदों को बीजेपी के साथ लाने का दावा करते हुए बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उनके इस कदम के बाद खैरथल में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। यदि निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बीजेपी को मिलता है, तो बोर्ड गठन की तस्वीर कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, निर्दलीय पार्षदों का अंतिम रुख और उनका समर्थन किस दल को मिलता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। दोनों पार्टियां अपने-अपने स्तर पर पार्षदों से बातचीत कर रही हैं।
अजमेर में बहुमत के लिए निर्दलीयों का सहारा
अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस को 37 सीटें मिली हैं। बीजेपी ने 32 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं। यहां बहुमत के लिए 41 पार्षदों का समर्थन चाहिए।
कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है, जबकि बीजेपी को बोर्ड बनाने के लिए और अधिक समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में अजमेर में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। दोनों दल निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। बोर्ड गठन से पहले पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
पाली में भी निर्दलीयों का समर्थन महत्वपूर्ण
पाली में कांग्रेस ने 29 सीटों पर जीत हासिल की है। बीजेपी को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली हैं। यहां भी किसी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है।
पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। बीजेपी भी निर्दलीय पार्षदों के साथ संपर्क बढ़ाने में जुटी है। ऐसे में दोनों दलों के बीच बातचीत और समर्थन जुटाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
जोधपुर में बराबरी का मुकाबला
जोधपुर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं। वहीं 12 सीटें निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई हैं। यहां बहुमत के लिए 51 वोटों की जरूरत है।
जोधपुर का मुकाबला सबसे दिलचस्प इसलिए बन गया है क्योंकि दोनों प्रमुख दल बराबरी पर हैं। दोनों पार्टियों को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में 12 निर्दलीय और अन्य पार्षदों का रुख बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बराबर सीटें मिलने के कारण दोनों दल अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आने वाले दिनों में किस दल को कितने पार्षदों का समर्थन मिलता है, इससे जोधपुर नगर निगम के बोर्ड की दिशा तय होगी।
अलवर में भी बहुमत से दूर दल
अलवर में बीजेपी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 23 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 13 सीटें मिली हैं। यहां बहुमत का आंकड़ा 33 है। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन वह भी बहुमत से पांच सीट दूर है।
कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए बीजेपी की तुलना में अधिक समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में निर्दलीय पार्षद दोनों दलों के लिए अहम हो गए हैं। अलवर में भी पार्षदों के समर्थन को लेकर बातचीत और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत के बावजूद बीजेपी की सक्रियता
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने 80 में से 42 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। इसके बावजूद बीजेपी मेयर पद की दावेदारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। बीकानेर में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन मेयर पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं।
बीजेपी की कोशिश है कि वह कुछ पार्षदों का समर्थन हासिल कर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सके। वहीं कांग्रेस अपने बहुमत को बनाए रखने और पार्षदों को एकजुट रखने पर ध्यान दे रही है।
खरीद-फरोख्त के आरोपों पर आमने-सामने बीजेपी-कांग्रेस
बोर्ड गठन की कोशिशों के बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सत्ता हासिल करने के लिए पार्षदों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है।
दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को निराधार बताया है। बीजेपी का कहना है कि वह कई पार्षदों के संपर्क में है और समर्थन जुटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
21 सितंबर तक जारी रहेगी बोर्ड गठन की जंग
राजस्थान के इन नगर निकायों में बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां 21 सितंबर तक जारी रहने की संभावना है। इस दौरान दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों से बातचीत कर समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे। कई जगहों पर अंतिम समय तक समीकरण बदल सकते हैं।
फिलहाल खैरथल, अजमेर, पाली, जोधपुर और अलवर जैसे निकायों में निर्दलीय पार्षदों का रुख सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत के बावजूद बीजेपी की सक्रियता ने मुकाबले को चर्चा में ला दिया है।
अब देखना होगा कि बोर्ड गठन के समय कौन-से पार्षद किस दल का समर्थन करते हैं और राजस्थान के अलग-अलग नगर निकायों में सत्ता की तस्वीर किस तरह सामने आती है।

