Monsoon Rainfall Deficit 2026: देश के 43% इलाके में बारिश सामान्य से कम, 342 जिलों में सूखे जैसे हालात

Monsoon Rainfall Deficit 2026: देश के 43% इलाके में बारिश सामान्य से कम, 342 जिलों में सूखे जैसे हालात

देश में इस साल मॉनसून की बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। Monsoon Rainfall Deficit 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर तक देश के बड़े हिस्से में बारिश सामान्य से कम रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और संबंधित वर्षा आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 18 सितंबर 2026 के बीच देश में कुल 691.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 812.1 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी देश में सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश हुई है।

बारिश की कमी सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े हिस्सों में इसका असर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश के करीब 43 फीसदी इलाके में बारिश सामान्य से कम रही है। इसका सीधा असर खेती, जल स्रोतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दक्षिणी प्रायद्वीप में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो दक्षिणी प्रायद्वीप में बारिश की स्थिति सबसे ज्यादा कमजोर रही है। यहां सामान्य से करीब 28 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मॉनसून की बारिश खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश में कमी का असर खरीफ फसलों के साथ-साथ जलाशयों और भूजल स्तर पर भी पड़ सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में चिंता ज्यादा बढ़ सकती है जहां सिंचाई के लिए किसान मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहते हैं।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी स्थिति चिंताजनक

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी सामान्य से करीब 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस क्षेत्र में बारिश की कमी का असर कृषि गतिविधियों और स्थानीय जल संसाधनों पर पड़ सकता है।

वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से करीब 9 फीसदी कम और मध्य भारत में करीब 6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। यानी देश के लगभग सभी प्रमुख मौसम क्षेत्रों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है।

IMD के आंकड़ों में जिलावार बारिश की स्थिति को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया जाता है, जिसमें सामान्य, कम, बहुत कम और अधिक बारिश वाले जिले शामिल होते हैं।

741 में से 342 जिलों में कम या बहुत कम बारिश

जिलावार आंकड़े भी इस साल की बारिश की स्थिति की तस्वीर साफ करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश के कुल 741 जिलों में से 342 जिलों में कम या बहुत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं 305 जिलों में सामान्य बारिश हुई है।

इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में जिले ऐसे हैं जहां मॉनसून की बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी। हालांकि देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश भी हुई है, लेकिन बारिश का असमान वितरण कई इलाकों के लिए चुनौती बना हुआ है।

किसानों के सामने बढ़ सकती है परेशानी

मॉनसून की बारिश का सीधा संबंध खरीफ फसलों से है। धान, सोयाबीन, कपास, दालों और कई अन्य फसलों के लिए पर्याप्त और सही समय पर बारिश जरूरी होती है। बारिश में कमी होने पर फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

हाल की रिपोर्टों में भी कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों पर दबाव का उल्लेख किया गया है। उदाहरण के तौर पर मराठवाड़ा में हाल की बारिश से सोयाबीन, कपास और तूर जैसी खरीफ फसलों को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।

इसके अलावा 2026 में बारिश के असमान वितरण का असर चावल उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, कम बारिश और खरीफ धान के रकबे में कमी के चलते भारत के चावल उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

पेयजल संकट की भी बढ़ी चिंता

बारिश की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने पर जलाशयों, तालाबों और भूजल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता पैदा हो सकती है।

खासकर उन इलाकों में जहां गर्मियों के दौरान पहले से ही पानी की समस्या रहती है, वहां कम मॉनसून बारिश आने वाले महीनों में अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।

मॉनसून की विदाई भी शुरू

इस बीच 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी भी शुरू हो गई है। IMD के अनुसार 19 सितंबर 2026 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून की वापसी शुरू हो गई

इसका मतलब है कि मॉनसून सीजन अब धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है। ऐसे में जिन इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां सीजन के अंत तक स्थिति में कितना सुधार होता है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।

इस साल बारिश का वितरण रहा असमान

2026 के मॉनसून में सिर्फ कुल बारिश की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसका वितरण भी महत्वपूर्ण रहा है। रिपोर्टों के अनुसार जून में बारिश में बड़ी कमी रही, जबकि जुलाई में स्थिति में कुछ सुधार हुआ। अगस्त और सितंबर में फिर बारिश सामान्य से नीचे रही।

इस तरह बारिश कभी कम और कभी ज्यादा होने के कारण किसानों और जल प्रबंधन से जुड़े विभागों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रही।

आगे क्या होगा?

फिलहाल देश में मॉनसून बारिश की कुल कमी करीब 15 फीसदी है। 18 सितंबर तक 691.9 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले सामान्य बारिश 812.1 मिलीमीटर होनी चाहिए थी।

आने वाले दिनों में जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी ज्यादा है, वहां स्थानीय स्तर पर बारिश की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। हालांकि मॉनसून की वापसी शुरू हो चुकी है, फिर भी कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

कुल मिलाकर Monsoon Rainfall Deficit 2026 ने किसानों, जल संसाधन विभागों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए चिंता बढ़ा दी है। 342 जिलों में कम या बहुत कम बारिश दर्ज होना बताता है कि इस साल मॉनसून का वितरण कई क्षेत्रों में सामान्य नहीं रहा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सीजन के अंतिम दिनों में बारिश की स्थिति में कितना सुधार होता है और इसका फसलों तथा जल उपलब्धता पर कितना असर पड़ता है।

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