अमेरिका का लगातार तीसरी रात ईरान पर हमला, हॉर्मुज में बढ़ा तनाव; भारतीय नाविक की मौत
US-Iran Conflict: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत और कई अन्य क्रू सदस्यों के घायल होने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है।
US-Iran Conflict के ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि हालात की मांग हुई तो अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और सहयोगी देशों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज के निकट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े दो तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलें दागीं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य क्रू सदस्य घायल हुए हैं। घायलों का उपचार जारी है और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यहां बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड समेत कच्चे तेल की कीमतों में नौ प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं या समुद्री यातायात प्रभावित होता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव ईंधन की कीमतों से लेकर महंगाई और परिवहन लागत तक दिखाई दे सकता है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत टोल लगाने का प्रस्ताव भी रखा है। इस प्रस्ताव पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। इस मुद्दे पर भी आने वाले दिनों में कूटनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। कई देशों ने अपने नागरिकों और समुद्री जहाजों के लिए सुरक्षा सलाह भी जारी की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार भी प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियां इस संकट की दिशा तय करेंगी।

