JPSC-CGL Case: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, SIT जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी
JPSC-CGL Case: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, SIT जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। JPSC-CGL Case में झारखंड हाईकोर्ट ने CID की ओर से की जा रही SIT जांच को लेकर अहम कदम उठाया है। अदालत ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को SIT की जांच के लिए Monitor/Observer नियुक्त किया है। यह व्यवस्था खास तौर पर इस बात को ध्यान में रखते हुए की गई है कि जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी को अनुचित तरीके से परेशान किए जाने की शिकायत हो तो उस पर ध्यान दिया जा सके।
18 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत के सामने अभ्यर्थियों की ओर से यह चिंता रखी गई थी कि जांच के नाम पर कुछ उम्मीदवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद कोर्ट ने जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जज को जिम्मेदारी दी।
SIT जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जज
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जस्टिस गौतम कुमार चौधरी यह देखने के लिए Monitor/Observer के रूप में काम करेंगे कि SIT की जांच के दौरान किसी नागरिक या अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी न हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निगरानी व्यवस्था SIT की कानूनी जांच में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं है।
यानी SIT अपने स्तर पर कानून के मुताबिक जांच जारी रख सकेगी, लेकिन जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी को अगर उत्पीड़न या अनुचित दबाव की शिकायत होती है तो वह निर्धारित व्यवस्था के तहत अपनी शिकायत रख सकता है।
रिटायर्ड IPS अधिकारी भी होंगे शामिल
जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की सहायता के लिए रिटायर्ड IPS अधिकारी आर.के. मलिक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनका काम निगरानी व्यवस्था में समन्वय करने में सहायता करना होगा।
इससे जांच से जुड़ी शिकायतों को सुनने और संबंधित पक्षों के बीच समन्वय की एक अलग व्यवस्था तैयार हो गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किसी व्यक्ति को जांच के लिए बुलाया जाना अपने आप में उत्पीड़न नहीं माना जा सकता। जांच में समन या पूछताछ का उद्देश्य तथ्यों को सामने लाना हो सकता है।
JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रिया पर विवाद
यह पूरा मामला झारखंड में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े विवाद के बीच सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं और मामले की जांच CID की SIT कर रही है।
राज्य सरकार ने अदालत में अपने जवाब में भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले का बचाव किया है। सरकार का पक्ष है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई थीं और ऐसी स्थिति बन गई थी जिसमें निष्पक्ष तरीके से चयनित उम्मीदवारों और कथित तौर पर अनुचित तरीके से लाभ पाने वाले उम्मीदवारों के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया था।
वहीं, याचिकाकर्ताओं और चयनित अभ्यर्थियों की ओर से भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है। मामले में अदालत ने पहले से लागू अंतरिम राहत को भी जारी रखा है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है?
JPSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार इन परीक्षाओं के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। ऐसे में परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर होने वाली हर कानूनी कार्रवाई का सीधा असर अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।
अब SIT की जांच आगे किस दिशा में जाती है और जांच के दौरान कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं, इस पर उम्मीदवारों की नजर रहेगी। साथ ही, जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी को शिकायत होने पर उसे अपनी बात रखने के लिए निगरानी व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।
जांच में समन मिलने का मतलब दोषी होना नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया कि किसी व्यक्ति को जांच के लिए समन किया जाना अपने आप में उसे दोषी नहीं बनाता। जांच एजेंसियां किसी मामले से जुड़े तथ्यों और लोगों की जानकारी हासिल करने के लिए पूछताछ कर सकती हैं।
ऐसे में अभ्यर्थियों को जांच में सहयोग करने की बात कही गई है, जबकि अदालत की ओर से यह भी सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है कि जांच के नाम पर किसी नागरिक के साथ अनुचित व्यवहार न हो।
अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को
JPSC-CGL मामले में अब अगली महत्वपूर्ण तारीख 7 अक्टूबर 2026 है। इसी दौरान मामले से जुड़े पक्ष अपनी दलीलें और जवाब आगे रख सकते हैं। फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी व्यवस्था के बाद SIT जांच और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। उम्मीदवारों की नजर अब एक तरफ SIT की जांच पर है, तो दूसरी तरफ हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर भी है। आने वाले समय में अदालत के सामने पेश होने वाली रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को SIT जांच का Monitor/Observer नियुक्त किए जाने से जांच के दौरान अभ्यर्थियों की शिकायतों को लेकर एक निगरानी व्यवस्था जरूर स्थापित हुई है। अब देखना होगा कि आने वाली सुनवाई में अदालत के सामने क्या तथ्य और रिपोर्ट पेश किए जाते हैं।

