TMC Name-Symbol Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी समय-सीमा
TMC Name-Symbol Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी समय-सीमा
टीएमसी नाम-सिंबल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी समय-सीमा
ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई, कोर्ट ने कहा- विवाद को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता; 28 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि वह दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लेगा। अदालत ने चुनाव आयोग को सोमवार, 28 सितंबर तक इस संबंध में समय-सीमा बताने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ममता बनर्जी की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज किया गया है।
चुनाव आयोग से सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वकील से आयोग से निर्देश लेकर यह बताने को कहा कि अंतिम तौर पर विवाद का निपटारा करने में कितना समय लगेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने और सबूत पेश करने का उचित अवसर मिलना चाहिए, लेकिन मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित भी नहीं रखा जा सकता।
अदालत की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग ने पहले ही आगामी उपचुनावों को देखते हुए दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह की अंतरिम व्यवस्था कर दी है। अब सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि आयोग मूल नाम और चुनाव चिन्ह पर चल रहे विवाद के अंतिम निपटारे के लिए एक व्यावहारिक समय-सीमा बताए।
कपिल सिब्बल ने क्या दलील दी?
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बीच पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किया गया। उनका तर्क था कि इस स्थिति में उनकी ओर से प्रभावी कानूनी उपाय का रास्ता प्रभावित हुआ है।
सिब्बल ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि वह मौजूदा उपचुनाव को रोकने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका जोर इस बात पर था कि चुनाव आयोग मूल विवाद का जल्द निपटारा करे, ताकि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता बनी न रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी संकेत दिया कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद मौजूदा अंतरिम व्यवस्था में सीधे हस्तक्षेप करना आसान नहीं होगा। अदालत के सामने फिलहाल मुख्य मुद्दा यह है कि चुनाव आयोग को मूल विवाद पर अंतिम फैसला लेने के लिए कितनी समय-सीमा दी जाए।
चुनाव आयोग ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और चिन्ह?
चुनाव आयोग के सामने तृणमूल कांग्रेस के संगठन और पहचान को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे सामने आए थे। आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावे को लेकर विस्तृत और वास्तविक निर्धारण की जरूरत है। इसके लिए आयोग को Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के तहत मामले पर आगे फैसला करना है।
अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग ने अंतिम रूप से यह तय कर दिया है कि मूल नाम और चिन्ह किस गुट को मिलेगा। फिलहाल यह केवल चुनावी प्रक्रिया को संचालित करने के लिए अंतरिम व्यवस्था है।
ममता गुट को मिला ‘फुटबॉल प्लेयर’ चिन्ह
आगामी उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है।
वहीं दूसरे प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ यानी लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। ये नाम और चिन्ह फिलहाल अंतरिम व्यवस्था का हिस्सा हैं और मूल TMC नाम तथा पारंपरिक चिन्ह पर अंतिम फैसला होने तक लागू रहेंगे।
यह अंतरिम व्यवस्था पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों के संदर्भ में की गई है। रिपोर्टों के अनुसार नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।
दूसरे गुट ने मांगा ज्यादा समय
सुनवाई के दौरान प्रतिद्वंद्वी गुट की ओर से पेश वकीलों ने भी अपनी दलील रखी। उनका कहना था कि यह केवल नाम और चुनाव चिन्ह का साधारण विवाद नहीं है, बल्कि इसमें संगठन, दस्तावेज और अन्य तथ्यात्मक पहलू शामिल हैं। इसलिए दोनों पक्षों को दस्तावेज और सबूत पेश करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने भी सुनवाई के दौरान कहा कि विस्तृत तथ्यात्मक विवाद होने के कारण बहुत कम समय में पूरी प्रक्रिया करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष सुनवाई के साथ-साथ मामले का अनावश्यक रूप से लंबा खिंचना भी उचित नहीं होगा।
28 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 28 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन चुनाव आयोग से यह बताने की उम्मीद है कि वह दोनों पक्षों को उचित अवसर देने के बाद मूल नाम और चुनाव चिन्ह विवाद पर अंतिम निर्णय लेने में कितना समय ले सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा रुख यह है कि आयोग को अपनी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी करनी चाहिए, लेकिन विवाद को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। अदालत ने पिछली कुछ चुनावी पार्टी-विवाद प्रक्रियाओं में देरी के प्रभाव का भी संदर्भ दिया।
TMC नाम-सिंबल विवाद में आगे क्या?
फिलहाल TMC नाम-सिंबल विवाद का अंतिम फैसला चुनाव आयोग को ही करना है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी मूल नाम या चुनाव चिन्ह किसी एक गुट को देने का फैसला नहीं किया है। अदालत का मौजूदा हस्तक्षेप मुख्य रूप से आयोग से समय-सीमा और प्रक्रिया को लेकर है।
अब 28 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उस दिन चुनाव आयोग अपनी प्रस्तावित समय-सीमा अदालत के सामने रखेगा। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि मूल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह पर अंतिम निर्णय की प्रक्रिया किस समय तक पूरी हो सकती है।
फिलहाल दोनों गुट आगामी उपचुनावों के लिए आयोग द्वारा दिए गए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के तहत चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं। मूल नाम और चिन्ह को लेकर अंतिम स्थिति चुनाव आयोग के विस्तृत निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

