चीन ने तिब्बत की नदी में मछलियों की निगरानी के लिए लगाया AI ‘फिश फेस’ सिस्टम
China AI Fish Face System: तिब्बत की नदी में शुरू हुई नई निगरानी तकनीक
चीन ने तिब्बत की सबसे बड़ी नदी यारलुंग त्सांगपो में मछलियों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘फिश फेस’ सिस्टम शुरू किया है। यह तकनीक बांध के फिशवे से गुजरने वाली मछलियों की प्रजातियों की पहचान करती है और उनकी आवाजाही पर 24 घंटे नजर रखती है।
चीन इसे जलीय पारिस्थितिकी संरक्षण और दुर्लभ मछली प्रजातियों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण कदम बता रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने बड़े हाइड्रोपावर बांधों के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर कुछ सवाल भी उठाए हैं।
क्या है AI ‘फिश फेस’ सिस्टम?
यह एक कंप्यूटर विजन और मशीन लर्निंग आधारित निगरानी प्रणाली है, जो पानी के भीतर लगे कैमरों और सेंसर की मदद से मछलियों की पहचान करती है।
सिस्टम की प्रमुख विशेषताएं:
- मछलियों की प्रजाति पहचान
- उनकी संख्या का अनुमान
- प्रवास (migration) के पैटर्न की निगरानी
- दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियों का ट्रैकिंग
- 24×7 स्वचालित डेटा संग्रह
पहले यह काम विशेषज्ञों द्वारा मैनुअल निरीक्षण से किया जाता था, जिसमें अधिक समय और संसाधन लगते थे।
यारलुंग त्सांगपो क्यों है महत्वपूर्ण?
यारलुंग त्सांगपो तिब्बत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह नदी आगे भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग कहलाती है और फिर ब्रह्मपुत्र के रूप में असम से होकर बहती है।
इस वजह से इस नदी पर होने वाली किसी भी बड़ी परियोजना का असर केवल चीन तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसका प्रभाव भारत और बांग्लादेश तक पहुंच सकता है।
चीन का क्या दावा है?
चीनी अधिकारियों का कहना है कि AI आधारित यह प्रणाली बांधों के आसपास मछलियों की गतिविधियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर रही है। उनके अनुसार:
- मछलियों की आबादी स्थिर बनी हुई है।
- फिशवे से गुजरने वाली प्रजातियों की पहचान पहले की तुलना में अधिक सटीक हो रही है।
- जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।
चीन का दावा है कि यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और जलविद्युत परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगी।
विशेषज्ञों की चिंता
हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निगरानी तकनीक से सभी समस्याओं का समाधान नहीं होता। उनका कहना है कि बड़े हाइड्रोपावर बांध मछलियों के प्राकृतिक प्रवास और प्रजनन चक्र को प्रभावित कर सकते हैं।
मुख्य चिंताएं:
- नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव
- प्रजनन स्थलों तक पहुंच में बाधा
- पानी के तापमान और ऑक्सीजन स्तर में परिवर्तन
- दीर्घकालिक जैव विविधता पर असर
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि AI निगरानी उपयोगी है, लेकिन इसके साथ व्यापक पर्यावरणीय अध्ययन और संरक्षण उपाय भी जरूरी हैं।
भारत क्यों रख रहा है नजर?
चूंकि यारलुंग त्सांगपो आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है, इसलिए चीन की इस परियोजना पर भारत भी करीबी नजर बनाए हुए है। ब्रह्मपुत्र पूर्वोत्तर भारत के लिए जल, कृषि, मत्स्य पालन और पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नदी है।
भारत लंबे समय से तिब्बत क्षेत्र में चीन द्वारा बनाए जा रहे बांधों और जलविद्युत परियोजनाओं पर रणनीतिक और पर्यावरणीय दोनों कारणों से ध्यान देता रहा है।
AI और पर्यावरण संरक्षण का नया दौर?
यह परियोजना इस बात का उदाहरण भी है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग केवल उद्योग और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण में भी तेजी से बढ़ रहा है।
दुनिया के कई देशों में AI का उपयोग:
- वन्यजीव गणना
- समुद्री जीवों की निगरानी
- जंगलों में अवैध शिकार रोकने
- जल गुणवत्ता विश्लेषण
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन
के लिए किया जा रहा है।

