Climate Akhada 2026: जलवायु परिवर्तन पर राज्यपाल संतोष गंगवार का बड़ा संदेश, विकास और पर्यावरण में संतुलन पर दिया जोर
रांची। Climate Akhada 2026 के समापन सत्र में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने जलवायु परिवर्तन को वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, आजीविका और अर्थव्यवस्था सहित जीवन के लगभग हर क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
रांची स्थित आड्रे हाउस में SAARTHI–झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क द्वारा आयोजित ‘जलवायु अखाड़ा 2026’ के समापन अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि इस चुनौती का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, युवाओं, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘जलवायु अखाड़ा’ नाम अपने आप में संवाद, सहभागिता और सामूहिक समाधान की भावना को दर्शाता है। झारखंड की सांस्कृतिक परंपरा में अखाड़ा केवल एक स्थान नहीं, बल्कि विचार-विमर्श, सीखने और सामूहिक निर्णय लेने का केंद्र माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब नीति निर्माता, विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और आम लोग एक मंच पर जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करते हैं तो व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान निकलने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने झारखंड की प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य घने जंगलों, समृद्ध खनिज संसाधनों, जैव विविधता और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां के लोगों का प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव रहा है। इसलिए राज्य के विकास की दिशा तय करते समय पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आर्थिक विकास देश की आवश्यकता है, लेकिन ऐसा विकास ही सार्थक होगा जो प्रकृति के संरक्षण के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास मॉडल की सफलता तभी मानी जाएगी जब उसमें पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक समावेशन और आने वाली पीढ़ियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए। विकसित भारत का सपना भी तभी साकार होगा जब विकास प्रकृति के प्रति संवेदनशील और समाज के प्रति समावेशी होगा।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रांची के बदलते मौसम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय रांची अपने सुहावने मौसम के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध था और अविभाजित बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी विशेष पहचान थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तापमान में लगातार वृद्धि और बढ़ती गर्मी यह संकेत दे रही है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब स्थानीय स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष रांची सहित झारखंड के कई जिलों में सामान्य से अधिक गर्मी महसूस की गई। यह केवल मौसम में सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
राज्यपाल ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य उनके हाथों में है। यदि युवा जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ऊर्जा संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संकल्प लें, तो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को मिलकर जनजागरूकता बढ़ानी होगी ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने भी जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। आयोजन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर सार्थक चर्चा करना था।
समापन संबोधन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विश्वास जताया कि यदि सरकार, विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर कार्य करें तो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सभी से प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

