Dhiru Ramani Kidnapping: माली में भारतीय मूल के कारोबारी धीरू रमानी का अपहरण, ₹44 करोड़ फिरौती के बाद रिहाई
Dhiru Ramani Kidnapping: माली में भारतीय मूल के कारोबारी धीरू रमानी का अपहरण, ₹44 करोड़ फिरौती के बाद रिहाई
माली में भारतीय मूल के हीरा कारोबारी धीरू रमानी के अपहरण का मामला आखिरकार तीन महीने बाद राहत भरे मोड़ पर पहुंच गया है। पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में अगवा किए गए 75 वर्षीय कारोबारी धीरू रमानी को कथित तौर पर करीब ₹44 करोड़ की फिरौती दिए जाने के बाद रिहा कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर विदेशों में कारोबार कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आतंक प्रभावित क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
तीन महीने बाद मिली आजादी
सूत्रों के अनुसार धीरू रमानी का अपहरण अप्रैल महीने में उस समय किया गया था, जब वे माली में अपनी हाल ही में खरीदी गई सोने की खदान के कार्यों की निगरानी कर रहे थे। अपहरण के बाद उनके परिवार और अपहरणकर्ताओं के बीच लंबे समय तक बातचीत चली।
बताया जा रहा है कि अपहरणकर्ताओं ने शुरुआत में लगभग ₹100 करोड़ की फिरौती की मांग रखी थी। हालांकि कई दौर की बातचीत के बाद यह रकम घटाकर करीब 4 मिलियन यूरो (लगभग ₹44 करोड़) पर सहमति बनी, जिसके बाद उनकी सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी।
गुजरात से अमेरिका और फिर अफ्रीका तक का कारोबार
धीरू रमानी मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के रहने वाले हैं। वे कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय हीरा कारोबार से जुड़े हुए हैं।
उनका परिवार अमेरिका में रहकर हीरा व्यापार का संचालन करता है, जबकि धीरू रमानी हाल के वर्षों में अफ्रीका में सोना और खनन क्षेत्र में निवेश कर रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने माली में एक नई सोने की खदान खरीदी थी और वहीं रहकर परियोजना का संचालन देख रहे थे।
परिवार ने खुद संभाली बातचीत
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस पूरे मामले में अमेरिका में रह रहे धीरू रमानी के परिवार ने सीधे अपहरणकर्ताओं से बातचीत की।
लंबी बातचीत और कई दौर की वार्ता के बाद फिरौती की रकम कम कराई गई और आखिरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित हो सकी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इस प्रक्रिया में भारत सरकार की किसी एजेंसी की प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आई।
रिहाई के बाद भी माली में ही हैं धीरू रमानी
रिहाई के बाद धीरू रमानी अभी भी माली में मौजूद हैं।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां उनसे पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ कर रही हैं ताकि अपहरणकर्ताओं के नेटवर्क और घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
राहत की बात यह है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई जा रही है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है।
भारतीय दूतावास ने जारी की थी एडवाइजरी
धीरू रमानी के अपहरण के बाद माली की राजधानी बमाको स्थित भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की थी।
दूतावास ने भारतीयों से अपील की थी कि वे—
- अनावश्यक यात्रा से बचें।
- स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से परहेज करें।
- अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
माली में लगातार बिगड़ रही है सुरक्षा स्थिति
पिछले कुछ वर्षों से माली में आतंकवादी गतिविधियां, सशस्त्र संघर्ष और अपहरण की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं।
विदेशी नागरिकों, खनन कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों को अक्सर निशाना बनाया जाता रहा है। यही वजह है कि कई देशों ने अपने नागरिकों को माली की यात्रा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी हुई है।
विदेशों में भारतीय कारोबारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
धीरू रमानी के अपहरण और फिरौती के बाद हुई रिहाई ने एक बार फिर विदेशों में कारोबार कर रहे भारतीय उद्योगपतियों और व्यापारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष प्रभावित देशों में निवेश करने वाले भारतीय कारोबारियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
आगे क्या होगा?
अब स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि अपहरण के पीछे कौन-सा गिरोह सक्रिय था।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भविष्य में ऐसे देशों में काम करने वाले विदेशी निवेशकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।
धीरू रमानी की सुरक्षित रिहाई उनके परिवार के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन यह घटना उन चुनौतियों की भी याद दिलाती है जिनका सामना अस्थिर देशों में व्यापार करने वाले उद्योगपतियों को करना पड़ता है।

