कोटा में 6 फीट लंबे मगरमच्छ का रेस्क्यू, वन विभाग ने जारी की सावधानी की अपील

Kota Crocodile Rescue: कोटा में 6 फीट लंबे मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू

राजस्थान के कोटा जिले में मॉनसून के दौरान एक बार फिर वन्यजीव रेस्क्यू का बड़ा मामला सामने आया है। Kota Crocodile Rescue की इस घटना में करीब 6 फीट लंबा मगरमच्छ रिहायशी इलाके में पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की टीम ने करीब एक घंटे तक चले अभियान के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़कर चंबल नदी में छोड़ दिया।


गांव में मगरमच्छ दिखते ही मची अफरा-तफरी

कोटा ग्रामीण के इटावा क्षेत्र स्थित रामपुरिया धाभाई गांव में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब लोगों ने बस्ती के पास करीब 6 फीट लंबे मगरमच्छ को घूमते हुए देखा। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। कई लोगों ने सुरक्षित दूरी बनाकर मगरमच्छ का वीडियो भी बनाया, जबकि कुछ लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी।


वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम के साथ वन्यजीव प्रेमी हयात खान उर्फ टाइगर मौके पर पहुंचे। प्रशिक्षित टीम ने पूरे क्षेत्र को खाली कराया और लोगों से मगरमच्छ से दूर रहने की अपील की। लगभग एक घंटे की सावधानीपूर्वक कार्रवाई के बाद मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ लिया गया।

रेस्क्यू के दौरान टीम ने विशेष उपकरणों का उपयोग किया ताकि मगरमच्छ और आसपास मौजूद लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


चंबल नदी में छोड़ा गया मगरमच्छ

रेस्क्यू पूरा होने के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से वन विभाग कार्यालय लाया गया, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास चंबल नदी में छोड़ दिया गया।

वन अधिकारियों का कहना है कि जंगली जीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ना सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका होता है।


हयात खान पहले भी कर चुके हैं कई सफल रेस्क्यू

वन्यजीव प्रेमी हयात खान (टाइगर) इससे पहले भी एक दर्जन से अधिक मगरमच्छों का सफल रेस्क्यू कर चुके हैं। इसके अलावा वे सांपों और अन्य वन्यजीवों को भी सुरक्षित पकड़कर लोगों की जान बचाने का काम करते रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने उनके इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि समय पर टीम पहुंचने से बड़ा हादसा टल गया।


बारिश में क्यों बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून के दौरान चंबल नदी और आसपास के जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। तेज बहाव के कारण मगरमच्छ कई बार नदी से निकलकर नालों, खेतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं।

इसी वजह से हर साल बारिश के मौसम में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।


वन विभाग ने लोगों से की खास अपील

वन विभाग ने नागरिकों से कहा है कि यदि कहीं मगरमच्छ दिखाई दे तो:

  • खुद पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें।
  • लाठी-डंडों या पत्थरों से हमला न करें।
  • बच्चों और पालतू जानवरों को दूर रखें।
  • तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
  • प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम के आने तक सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।


स्थानीय लोगों में राहत

मगरमच्छ के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने वन विभाग और रेस्क्यू टीम का धन्यवाद करते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई होने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि मॉनसून के दौरान संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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