JPSC-JSSC विवाद में छात्रों के समर्थन में निर्जला अनशन पर बैठे जयराम महतो, सरकार को दी चेतावनी

Jairam Mahato Hunger Strike: JPSC-JSSC विवाद में बढ़ा राजनीतिक दबाव

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और व्यापक होता दिख रहा है। हजारों अभ्यर्थियों द्वारा कथित अनियमितता, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग के बीच अब जयराम महतो भी छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने निर्जला अनशन शुरू कर सरकार को चेतावनी दी है कि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक वार्ता हो चुकी है, लेकिन CBI जांच समेत कई अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।


छात्र आंदोलन को मिला नया समर्थन

पिछले कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में छात्र धरना और सत्याग्रह कर रहे हैं। कई छात्र अनशन पर भी बैठे हुए हैं। अब जयराम महतो के निर्जला अनशन पर बैठने से आंदोलन को एक नया राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिला है।

उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है।


जयराम महतो ने सरकार को क्या कहा?

अनशन शुरू करते हुए जयराम महतो ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर तत्काल और ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।

उनके अनुसार:

  • भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
  • भविष्य की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
  • छात्रों के साथ सम्मानजनक संवाद जारी रखा जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि युवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।


निर्जला अनशन ने बढ़ाई चिंता

जयराम महतो का निर्जला अनशन शुरू होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ गई है। पहले से ही आंदोलन स्थल पर कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आ चुकी हैं। लगातार बारिश, उमस और भीड़भाड़ के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।

डॉक्टरों की टीम आंदोलन स्थल पर नजर बनाए हुए है और अनशनकारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है।


सरकार और छात्रों के बीच हुई थी पहली वार्ता

हाल ही में रांची के राजकीय अतिथिशाला में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बैठक हुई थी। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने उस बैठक को सकारात्मक बताया था और कहा था कि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।

हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण मांग CBI जांच पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। छात्रों ने साफ कर दिया कि जब तक इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।


JPSC-JSSC विवाद क्यों बना बड़ा मुद्दा?

छात्र संगठनों का आरोप है कि कुछ भर्ती परीक्षाओं में:

  • प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका रही,
  • मेरिट प्रक्रिया पर सवाल उठे,
  • पारदर्शिता की कमी दिखाई दी,
  • और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।

झारखंड में लंबे समय से सरकारी भर्तियों में देरी और अनियमितता को लेकर युवाओं में नाराजगी रही है। इसी वजह से यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित न रहकर व्यापक युवा असंतोष का प्रतीक बन गया है।


राजनीतिक असर भी बढ़ने लगा

जयराम महतो के आंदोलन में शामिल होने के बाद यह मुद्दा अब केवल छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील होता जा रहा है। विपक्षी दल और विभिन्न सामाजिक संगठन भी लगातार इस मामले पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है, तो इसका असर राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।


आगे क्या हो सकता है?

सूत्रों के अनुसार सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच जल्द दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है। यदि सरकार जांच की प्रक्रिया और भर्ती सुधारों को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव देती है, तो गतिरोध कम हो सकता है।

लेकिन यदि CBI जांच और अन्य प्रमुख मांगों पर समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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