JPSC भर्ती पर फिर बवाल, रघुवर दास ने की CBI जांच की मांग
JPSC CBI Inquiry: झारखंड में एक बार फिर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता में विश्वास रखती है और उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे बिना किसी देरी के मामले की CBI जांच की सिफारिश करनी चाहिए।
रघुवर दास ने कहा कि JPSC की विभिन्न परीक्षाओं को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन विवादों के कारण हजारों मेहनती और योग्य युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिससे आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होती, तो बार-बार इस तरह के विवाद सामने नहीं आते। उनके अनुसार युवाओं का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर युवाओं के हित में फैसला लेना चाहिए। उनका मानना है कि CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी की जांच से सभी तथ्यों का खुलासा होगा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर बने संदेह दूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शी जांच से योग्य अभ्यर्थियों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
रघुवर दास ने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा कि JPSC जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की साख बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस मांग के बाद झारखंड की राजनीति में भी नया विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखने का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है।
छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सके। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि यदि जांच होती है तो लंबे समय से उठ रहे सवालों का जवाब भी सामने आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, समयबद्धता और निष्पक्षता बेहद जरूरी होती है। यदि इन सिद्धांतों पर सवाल उठते हैं तो उसका सीधा असर लाखों युवाओं के भविष्य और सरकारी संस्थाओं पर जनता के भरोसे पर पड़ता है।
अब सभी की निगाहें झारखंड सरकार पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या फैसला लेती है। यदि सरकार CBI जांच की सिफारिश करती है तो यह मामला नए मोड़ पर पहुंच सकता है। वहीं यदि जांच की मांग नहीं मानी जाती है तो विपक्ष और छात्र संगठनों की ओर से आंदोलन और राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सके। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि यदि जांच होती है तो लंबे समय से उठ रहे सवालों का जवाब भी सामने आएगा।

