केतन अग्रवाल मर्डर केस में नया खुलासा! भाई के बयान से बदली जांच की दिशा, डिलीट चैट्स खंगाल रही पुलिस
केतन अग्रवाल मर्डर केस में नया खुलासा! भाई के बयान से बदली जांच की दिशा, डिलीट चैट्स खंगाल रही पुलिस
Ketan Agarwal Murder Case में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुणे के चर्चित कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत की जांच में अब परिवार के सदस्यों के बयान, डिजिटल सबूत और मोबाइल डेटा अहम भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर मामले की हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल से लंबी पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें पुलिस को बताईं।
पुलिस के अनुसार, साहिल गोयल ने पूछताछ के दौरान कहा कि यदि सिया ने पहले ही परिवार को यह बता दिया होता कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती, तो परिवार इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सिया ने चेतन चौधरी के साथ विवाह करने की इच्छा जताई होती तो परिवार उस विकल्प पर भी विचार कर सकता था। यह बयान पुलिस के लिए जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इससे संभावित पारिवारिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिल रही है।
दूसरी ओर, केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि उन्हें पहले से पता होता कि लड़की इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थी, तो यह विवाह प्रस्ताव उसी समय समाप्त कर दिया जाता। उनका कहना है कि किसी की जान लेने जैसी घटना की कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी और यदि असहमति थी तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता था।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सिया गोयल ने कथित तौर पर यह कहा कि परिवार का सामना कर शादी से इनकार करने की तुलना में केतन को रास्ते से हटाना उसे आसान लगा। पुलिस का दावा है कि यह कथित बयान मामले के संभावित मकसद (मोटिव) को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि इस कथित बयान की पुष्टि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू 17 जून की वह मुलाकात है, जो घटना से एक दिन पहले पुणे के एक कैफे में हुई थी। पुलिस का कहना है कि सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी करीब एक घंटे तक कैफे में साथ रहे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इसी दौरान कथित हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया गया था। फिलहाल कैफे के सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच में डिजिटल फोरेंसिक भी बेहद अहम बन गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट, इंस्टाग्राम संदेश और अन्य डिजिटल डेटा कथित तौर पर हटाए गए थे। अब फोरेंसिक विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बातचीत, लोकेशन और घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा सकें। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिकवर होने वाला डिजिटल डेटा मामले की कई अहम कड़ियों को स्पष्ट कर सकता है।
पुलिस ने इससे पहले यह भी जानकारी दी थी कि दोनों आरोपियों के बीच पिछले कई महीनों में लगभग 2,004 फोन कॉल हुए थे, जिनकी कुल अवधि करीब 238 घंटे बताई गई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतनी लंबी और लगातार बातचीत की भी जांच जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दोनों के बीच किस प्रकार का संपर्क था और क्या उसका संबंध इस मामले से था।
वहीं, बचाव पक्ष का कहना है कि अभी तक अभियोजन के पास ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रत्यक्षदर्शी (Eyewitness) या निर्णायक साक्ष्य नहीं है जो आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध करता हो। आरोपी पक्ष ने अदालत में अपनी बेगुनाही का दावा किया है और कहा है कि जांच पूरी होने तथा अदालत में साक्ष्यों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल पुणे ग्रामीण पुलिस, फोरेंसिक विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों की टीम इस हाई-प्रोफाइल मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि चार्जशीट तैयार करने से पहले सभी डिजिटल, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया जाएगा। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष केवल न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

