Mumbai-Pune Expressway पर भूस्खलन, ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना पर उठे सवाल; यातायात ठप

Mumbai-Pune Expressway Landslide: महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में से एक मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भी देखने को मिला है। सोमवार सुबह खंडाला एग्जिट के पास हुए बड़े भूस्खलन के कारण एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ सेक्शन पर भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने तुरंत पुणे से मुंबई जाने वाली लेन को बंद कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार यह घटना उस स्थान के पास हुई, जहां 8.9 किलोमीटर लंबी आधुनिक सुरंग का एग्जिट बनाया गया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक ढह गया और चट्टानें व मिट्टी सड़क पर आ गिरीं। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और संबंधित एजेंसियों को तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया।

भूस्खलन की सूचना मिलते ही महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC), पुलिस, आपदा प्रबंधन टीम और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से सड़क पर गिरे मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया। प्रशासन ने कहा कि मार्ग को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यातायात दोबारा शुरू किया जाएगा। इस दौरान यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

गौरतलब है कि ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का उद्घाटन इसी वर्ष 1 मई को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर किया गया था। करीब 6,695 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को देश की आधुनिक सड़क इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया था। इस परियोजना के शुरू होने से मुंबई और पुणे के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हुई, जबकि यात्रा समय में करीब 30 मिनट की बचत होने लगी।

इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एशिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंगों में शामिल सुरंगों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा आधुनिक केबल-स्टे पुल, उन्नत सुरक्षा प्रणाली और तेज यातायात को ध्यान में रखते हुए कई नई सुविधाएं भी विकसित की गई थीं। उद्घाटन के समय इसे महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे की बड़ी उपलब्धि बताया गया था।

हालांकि, परियोजना शुरू होने के महज दो महीने के भीतर ही हुए इस भूस्खलन ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस तरह की परियोजनाओं में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है। वहीं कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भी परियोजना की मजबूती और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि घटना के कारणों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि भूस्खलन केवल अत्यधिक बारिश की वजह से हुआ या फिर ढलानों की सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी रही। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

मौसम विभाग ने भी महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और यात्रा से पहले यातायात की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। खासकर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से यात्रा करने वाले वाहन चालकों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करती हैं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय बन जाती हैं। फिलहाल राहत एजेंसियां तेजी से मलबा हटाने में जुटी हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि मौसम अनुकूल रहने पर जल्द ही यातायात सामान्य कर दिया जाएगा।

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